हवा-हवाई साबित हुआ 1 देश 1 चुनाव अभियान, BJP ने इस बहाने लगातार चलाया था अभियान
प्रतीकात्मक तस्वीर
वर्ष 2014 में केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के एक साल बाद भाजपा और मोदी सरकार ने जोरशोर से एक देश एक चुनाव अभियान चलाया था। एक समय पीएम नरेंद्र मोदी अपने हर भाषण में इसका इस्तेमाल कर इसकी व्यावहारिकता की बात करते थे। विधि आयोग ने इस संबंध में विभिन्न दलों की राय ली थी तो चुनाव आयोग ने एक साथ चुनाव कराने में खुद को सक्षम बताया था। हालांकि रविवार को घोषित हुए चुनाव कार्यक्रम से यह साबित हो गया कि यह अभियान हवा-हवाई साबित हुआ है। आयोग ने आम चुनाव के साथ महज चार राज्यों आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा में ही विधानसभा चुनाव कराने की घोषणा की। जम्मू-कश्मीर पर भी अंतिम फैसला नहीं हो पाया। हालांकि पहले चर्चा थी कि इस अभियान को चुनावी धार देने के लिए भाजपा उन तीन राज्यों हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव करा सकती है, जिसका कार्यकाल इसी साल के अंत में खत्म हो रहा है।
दरअसल इस सियासी दृष्टि से मुफीद नहीं बैठने के बाद इस अभियान को आगे बढ़ाने वाली भाजपा ने ही अपने कदम पीछे हटा लिये। पहले उसकी योजना उपरोक्त राज्यों में पीएम मोदी की छवि के आधार पर विधानसभा चुनाव की चुनौती से पार पाने की थी। मगर हरियाणा में जींद उपचुनाव के नतीजे, महाराष्ट्र में सहयोगी शिवसेना से विधानसभा चुनाव में सीएम पद पर अंतिम फैसला न होने केकारण इसे टाल दिया गया।
जींद उपचुनाव में हालांकि भाजपा को जीत हासिल हुई। मगर गैरजाट मतों में हुए बंटवारे के बाद पार्टी ने चुनाव को समय पर कराने का फैसला किया। झारखंड इकाई हालांकि समय पूर्व चुनाव के लिए राजी थी, मगर अन्य दो राज्यों पर सहमति न बनने के कारण इसे टाल दिया गया।