Lok Sabha Election: चुनाव आयोग हुआ सख्त, हर मतदान केंद्र पर होगी VVPAT

जनवरी के पहले सप्ताह में तमिलनाडु काडर के पूर्व आईएएस एमएस देवसहायम, पूर्व राजनयिक केपी फैबियन और पूर्व बैंकर टीएफ राजेंद्र देव ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर कम से कम तीस प्रतिशत ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीनों को लगाए जाने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह करने से ईवीएम की कार्यकुशलता पर लग रहे सवालो पर विराम लग जाएगा। विपक्षी दलों ने इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत वीवीपैट की मांग की है।
लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने रविवार को सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट मशीनें उपलब्ध कराने की घोषणा कर विपक्ष के आरोपों की हवा निकाल दी। क्या हर ईवीएम के साथ वीवीपैट लगाई जाएगी और क्या हर ईवीएम और वीवीपैट की गणना का मिलान कराया जाएगा? मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है और चुनाव आयोग ने इस मामले पर एक कमेटी बना दी है, उसकी रिपोर्ट आने पर ही इन विषयों पर फैसला होगा।
इससे पहले शनिवार को आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से सैनिकों और सैन्य उपकरणों को चुनाव सामग्री में इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाया था। सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ नेताओं ने देश भर में कई स्थानों पर पुलवामा और एयर स्ट्राइक का राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे पोस्टर लगवा किए थे जिन पर विंग कमांडर अभिनंदन, लड़ाकू हवाई जहाज़ों या सैनिकों की तस्वीरें छपी थीं। दिल्ली राज्य भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी सैनिकों की वर्दी पहन कर चुनाव प्रचार करते नज़र आए थे। इन घटनाओं की विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी।
छोटे राज्यों में कई चरणों में चुनाव
चुनाव आयोग ने इस बार कई छोटे राज्यों में सख़्ती बरतते हुए एक से ज्यादा चरणों में मतदान कराने का फैसला किया है। मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान जैसे राज्यो में अधिकतर एक ही चरण में चुनाव होते रहे हैं। लेकिन इस बार उड़ीसा और मध्य प्रदेश में चार चरणों में मतदान होगा जबकि असम और छत्तीसगढ में तीन चरणों में। यही नहीं, दो-दो लोकसभा सीटों वाले त्रिपुरा और मणिपुर में चुनाव दो चरणों में होंगे - हर चरण में एक सीट। यही हाल जम्मू कश्मीर का है। यानी संवेदनशील राज्यों में चुनाव आयोग गड़बड़ी होने ही नहीं देना चाहता है।