मध्यस्थता से बनेगा Ayodhya में Ram मंदिर, जानें Supreme Court की बड़ी बातें
सुप्रीम कोर्ट
खास बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामला मध्यस्थता के लिए सौंपा।
- सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्लाह, श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू को मध्यस्थ बनाया
- 4 हफ्ते में मध्यस्थ समिति को अपना रिपोर्ट सौंपना होगा
- सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की प्रक्रिया की रिपोर्टिंग पर बैन लगाया
सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामला मध्यस्थता के लिए सौंप दिया। सेवानिवृत्त न्यायाधीश एफ एम कलीफुल्ला को सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता करने वाले पैनल का मुखिया नियुक्त किया है। साथ ही मध्यस्थता के लिए दो अन्य सदस्य श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचु होंगे। एक हफ्ते के अंदर यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अदालत ने कहा है कि चार हफ्ते के अंदर मध्यस्थता पैनल को बताना होगा कि बात कहां तक पहुंची। अदालत का कहना है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया कैमरे के सामने की जाएंगी। यह प्रक्रिया फैजाबाद में होंगी। जिसका नेतृत्व जस्टिस कलीफुल्ला करेंगे। पैनल को आठ हफ्तों के अंदर पूरी रिपोर्ट देनी होगी। साथ ही चार हफ्तों में यह प्रक्रिया शुरू करनी होगी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, 'अदालत की निगरानी में मध्यस्थता कार्यवाही गोपनीय होगी।'
यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी मध्यस्थता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मध्यस्थता से आज इस मामले को कोई हल नहीं हो सका है। उत्तर प्रदेश के मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। अगर यह मामला आपसी बातचीत से सुलझाया जा सकता है तो इससे अच्छी बात और कुछ नहीं हो सकती।
निर्मोही अखाड़े से जुड़े लोगों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले में मध्यस्थता का आदेश देने का स्वागत किया है। वहीं, महंत राजू दास का कहना है कि क्या अयोध्या में संत नहीं थे जो मध्यस्थता के लिए श्री श्री रविशंकर को भेजा जा रहा है। साफ पता चल रहा है कि मामले को फिर से लटकाने की कोशिश हो रही है।