Goa में सियासी उठापटक जारी, BJP का दावा- आज ही नए CM लेंगे शपथ

प्रमोद सावंत और विश्वजीत राणे - फोटो : social media
खास बातें
- गोवा के नए सीएम के लिए गडकरी की भाजपा और एमजीपी के नेताओं के साथ मंथन
- प्रमोद सावंत, सुदीन धावालिकर, विश्वजीत राणे समेत कई नामों की अटकलें तेज
- भाजपा और कांग्रेस की ओर से सत्ता के लिए जोड़तोड़, तीन बजे आज ही शपथ भी संभव
- इस बीच कांग्रेस के सभी विधायक भी राज्यपाल से मिले।
गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर के निधन के बाद से ही प्रदेश में सियासी उठापटक तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस यहां अपनी सरकार बनाने का दावा पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा अपनी सरकार बचाने में लगी हुई है। रविवार देर रात परिकर के निधन के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी गोवा गए और वहां उन्होंने विधायकों के साथ बैठक की।
मुख्यमंत्री का आज ही होगा शपथग्रहण : गोवा भाजपा प्रमुख
गोवा भाजपा के अध्यक्ष विनय तेंदुलकर ने कहा कि आज दोपहर दो बजे तक स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य का नया मुख्यमंत्री कौन होगा। तेंदुलकर ने पणजी के पास एक होटल में केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी के साथ बैठक के बाद यह बात कही। तेंदुलकर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में अभी निर्णय लिया जाना है। लेकिन अपराह्न दो बजे तक तस्वीर साफ हो जाएगी।’’उन्होंने कहा कि नए मुख्यमंत्री का शपथग्रहण आज अपराह्न तीन बजे होगा।
तेंदुलकर ने मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत के साथ गडकरी से मुलाकात की। इससे पहले गडकरी ने सुदीन धवलीकर के नेतृत्व में आए महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) के विधायकों तथा भाजपा विधायक विश्वजीत राणे से मुलाकात की।
तेंदुलकर ने मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत के साथ गडकरी से मुलाकात की। इससे पहले गडकरी ने सुदीन धवलीकर के नेतृत्व में आए महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) के विधायकों तथा भाजपा विधायक विश्वजीत राणे से मुलाकात की।
भाजपा को समर्थन देने पर फैसला लेगी एमजीपी की कार्यकारी समिति
गोवा में सत्तारूढ़ भाजपा के सहयोगी दल महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) ने कहा कि उसकी कार्यकारी समिति इस पर फैसला लेगी कि राज्य सरकार को समर्थन जारी रखा जाए या नहीं। एमजीपी नेता सुदीन धवलीकर ने मुख्यमंत्री मनोहर परिकर के निधन के बाद राज्य की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी से पणजी के समीप एक होटल में चर्चा की।
कौन हैं प्रमोद सावंत
सूत्र बता रहे हैं कि इन सब के बीच गोवा विधानसभा के स्पीकर प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री बनाए जाने की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। इस बारे में अंतिम फैसला अभी तक नहीं लिया गया है।
प्रमोद सावंत दो बार विधायक बन चुके हैं, इससे पहले वे भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी थे। हालांकि पार्टी के भीतर ही प्रमोद सावंत को विरोध का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कहा जाता है कि वो अभी बहुत नए हैं। उनके अलावा श्रीपद नाइक भी एक नाम हैं जो मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल हैं। जो इस वक्त केंद्र सरकार में आयुष मंत्री हैं। उन्हें वापस बुलाकर राज्य की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
कांग्रेस में इस बात को लेकर आशंका है कि भाजपा राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करवा सकती है। वहीं भाजपा खेमे में यह चर्चा है कि विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत को अतंरिम मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। जिससे कि पार्टी को आगे की रणनीति बनाने का मौका मिल जाए। दोनों पार्टियों के सूत्रों का कहना है कि यदि राज्यपाल मृदुला सिन्हा संख्या से संतुष्ट नहीं होती हैं तो वह लोकसभा चुनाव तक विधानसभा को निलंबित करने की सिफारिश कर सकती हैं।
प्रमोद सावंत दो बार विधायक बन चुके हैं, इससे पहले वे भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी थे। हालांकि पार्टी के भीतर ही प्रमोद सावंत को विरोध का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कहा जाता है कि वो अभी बहुत नए हैं। उनके अलावा श्रीपद नाइक भी एक नाम हैं जो मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल हैं। जो इस वक्त केंद्र सरकार में आयुष मंत्री हैं। उन्हें वापस बुलाकर राज्य की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
कांग्रेस में इस बात को लेकर आशंका है कि भाजपा राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करवा सकती है। वहीं भाजपा खेमे में यह चर्चा है कि विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत को अतंरिम मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। जिससे कि पार्टी को आगे की रणनीति बनाने का मौका मिल जाए। दोनों पार्टियों के सूत्रों का कहना है कि यदि राज्यपाल मृदुला सिन्हा संख्या से संतुष्ट नहीं होती हैं तो वह लोकसभा चुनाव तक विधानसभा को निलंबित करने की सिफारिश कर सकती हैं।
राजभवन पहुंची कांग्रेस

विधायक राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मिले - फोटो : ANI
उधर अपनी सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए कांग्रेस के 14 विधायक सोमवार को राज्यपाल मृदुला सिन्हा के पास भी गए। कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की सोमवार सुबह पणजी में बैठक हुई है। विपक्ष के नेता चंद्रकांत कावेलकर का कहना है कि राज्यपाल द्वारा समय नहीं देने से कारण पार्टी के विधायकों ने बिना बुलाए राजभवन जाने का फैसला लिया।
कावेलकर का कहना है, "हम सदन में बहुमत वाली पार्टी हैं और राज्यपाल से मिलने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। परिकर के निधन के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है इसलिए हम मांग करते हैं कि हमें सरकार बनाने के लिए बुलाया जाए।"
राज्यपाल से मिलने के बाद कावेलकर ने कहा, "हमने राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया, जैसा कि हम राज्य में सबसे बड़ी पार्टी हैं। हमारे पास 14 विधायक हैं और हमें सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। हमने बताया है कि हम बहुमत साबित करेंगे। गोवा के मुख्यमंत्री के निधन से दुखी हैं।"
किसी के पास नहीं है बहुमत
राज्यपाल से मिलने के बाद कावेलकर ने कहा, "हमने राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया, जैसा कि हम राज्य में सबसे बड़ी पार्टी हैं। हमारे पास 14 विधायक हैं और हमें सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। हमने बताया है कि हम बहुमत साबित करेंगे। गोवा के मुख्यमंत्री के निधन से दुखी हैं।"
राज्य में मौजूद विधायकों की वर्तमान संख्या फिलहाल किसी पार्टी के पक्ष में नहीं है। वहीं इस समय किसी भी पार्टी ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चुनाव नहीं किया है जो सदन में बहुमत साबित कर सके। राज्य में विधानसभा की 36 सीटे हैं। परिकर और फ्रांसिस डिसूजा के निधन से भाजपा की दो सीटें कम हो गई हैं। वहीं कांग्रेस के दो विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इस समय 14 विधायकों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है।
महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के पास तीन-तीन विधायक हैं। एनसीपी के पास एक और निर्दलीय विधायकों के पास तीन सीटें हैं। भाजपा के पास राज्य की 12 सीटे हैं। जिसमें से एक पांडुरंग मडकईकर अस्पताल में हैं और इस बात की बहुत कम आशंका है कि वह विधानसभा में वोट करने के लिए आएंगे। यही कारण है कि कांग्रेस बोल रही है कि उसके पास 14 विधायक हैं जबकि भाजपा के पास 11 हैं। इसलिए उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।
महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के पास तीन-तीन विधायक हैं। एनसीपी के पास एक और निर्दलीय विधायकों के पास तीन सीटें हैं। भाजपा के पास राज्य की 12 सीटे हैं। जिसमें से एक पांडुरंग मडकईकर अस्पताल में हैं और इस बात की बहुत कम आशंका है कि वह विधानसभा में वोट करने के लिए आएंगे। यही कारण है कि कांग्रेस बोल रही है कि उसके पास 14 विधायक हैं जबकि भाजपा के पास 11 हैं। इसलिए उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।