'Rahul Gandhi का दावा गलत, Masood Azhar के साथ नहीं गए थे Ajit Dobhal'

डोभाल अजहर की रिहाई से पहले कंधार गए थे ताकि आईएसआई नियंत्रित हाईजैकर्स और तालिबान के नेताओं के साथ बातचीत कर सकें। यह दावा तत्कालीन गृहमंत्री लालाकृष्ण आडवाणी और रॉ के मुखिया रहे एएस दुलात ने अपनी किताबों माई कंट्री, माई लाइफ और द वाजपेयी ईयर्स में किया है। उस समय विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह आतंकी अजहर और दो आतंकियों के साथ विमान में सवार थे।
इन दोनों आतंकियों ने बाद में अमेरिकन पत्रकार डेनियल पर्ल और मुश्ताक जारगर की हत्या कर दी थी। सूत्र ने कहा, 'वाजपेयी सरकार ने अजहर को छोड़ने का फैसला किया था ताकि 161 भारतीयों की जिंदगी को बचाया जा सके। आतंकियों ने शपथ ली थी कि यदि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तो वह उन सभी को मार देंगे। यह अच्छा या बुरा जैसा निर्णय था इसपर चर्चा हो सकती है लेकिन इससे उस अधिकारी पर उंगली नहीं उठाई जा सकती जिसने निर्देशों का पालन किया था।'
आतंकी 13 अरब 94 करोड़ 27 लाख रुपये की फिरौती के साथ ही भारतीय यात्रियों के बदले भारतीय जेलों में कैद 36 आतंकवादियों की रिहाई चाहते थे। डोभार और दूसरे भारतीय वार्ताकार जिसमें खुफिया ब्यूरो के एनएस संधू और वरिष्ठ रॉ अधिकारी सीडी सहाय भी शामिल थे उन्होंने आतंकियों से उनकी मांगे कम करवाने में सफलता हासिल की। हालांकि आतकियों ने धमकी दी थी कि अगर अजहर और ओमार शेख को रिहा नहीं किया गया तो वह यात्रियों को मार देंगे।