Ranbaxy विवाद : Supreme Court ने सिंह भाइयों से पूछा, कैसे चुकाओगे 3500 करोड़ रुपये

क्या है पूरा मामला
शीर्ष अदालत बृहस्पतिवार को जापानी कंपनी दायची सैंक्यो की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सिंह भाइयों को सिंगापुर ट्रिब्यूनल की तरफ से दिए गए 3500 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश देने का आग्रह शीर्ष अदालत से किया गया था। दायची ने 2008 में रेनबैक्सी का अधिग्रहण किया था, जिसके बाद उसने सिंह भाइयों पर सौदे के दौरान कंपनी पर अमेरिका में हुई कार्रवाई की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था और सिंगापुर आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की थी।
इसी मामले में ट्रिब्यूनल ने सिंह भाइयों को दायची को 3500 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया था, लेकिन वह इसे नकार रहे थे। दायची ने बाद में अमेरिकी न्याय विभाग से 50 करोड़ डॉलर में समझौता कर लिया था। बाद में दायची ने 2015 में रेनबैक्सी को 22,679 करोड़ रुपये में सन फार्मास्यूटिक्लस को बेच दिया था।
लगाई हुई है अवमानना याचिका भी
जापानी कंपनी दायची ने दोनों भाइयों के खिलाफ शीर्ष अदालत में अवमानना याचिका लगाई हुई, जिसमें कहा गया था कि उसे फोर्टिस हेल्थकेयर के शेयरों में हिस्सेदारी देने का वादा किया गया था। पीठ ने दायची के आग्रह पर पहले फोर्टिस के शेयर मलेशियाई आईआईएच हेल्थकेयर बरहाद को बेचने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन पिछले साल 14 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे।
फोर्टिस में 4000 करोड़ रुपये के निवेश से 31.1 फीसदी शेयर खरीदकर आईआईएच इस कंपनी पर अपना नियंत्रण बनाने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव को पिछले साल जुलाई में फोर्टिस हेल्थकेयर का बोर्ड मंजूरी दे चुका है।