Supreme Court ने NRC मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग से पूछा सवाल - Bharat news, bharat rajniti news, uttar pradesh news, India news in hindi, today varanasi newsIndia News (भारत समाचार): India News,world news, India Latest And Breaking News, United states of amerika, united kingdom

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मंगलवार, 12 मार्च 2019

Supreme Court ने NRC मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग से पूछा सवाल

Supreme Court ने NRC मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग से पूछा सवाल


सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
निर्वाचन आयोग ने असम की राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे से शामिल नहीं किये गये 40 लाख से अधिक लोगों की शंकाओं को दूर करते हुये मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि इससे लोकसभा चुनाव में मत देने का उनका अधिकार प्रभावित नहीं होगा बशर्ते मतदाता सूची में उनके नाम होने चाहिए। शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग से यह स्पष्ट करने के लिये कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम 31 जुलाई को प्रकाशित होने वाली अंतिम असम राष्ट्रीय नागरिक पंजी में शामिल नहीं हुआ परंतु मतदाता सूची में होगा तो ऐसी स्थिति में क्या होगा।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने निर्वाचन आयोग से कहा कि जनवरी, 2017, 2018 और 2019 के लिये पुनरीक्षित मतदाता सूचियों में शामिल किये गये या निकाले गये नामों का विवरण 28 मार्च तक उपलब्ध कराये।

इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने आयोग के सचिव, जो न्यायालय के निर्देश पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर थे, से जानना चाहा कि ऐसे व्यक्तियों की क्या स्थिति होगी जिनका नाम राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे में नहीं है लेकिन मतदाता सूची में शामिल है।

शीर्ष अदालत ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आठ मार्च को आयोग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि कई श्रेणियों के लोगों कों आगामी लोकसभा चुनाव में मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। आयोग के सचिव ने जवाब दिया कि नागरिक पंजी में नाम शामिल नहीं किये जाने की वजह से ऐसे लोगों के मत देने का अधिकार प्रभावित नहीं होगा 

आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि आयोग ने 2014 में ही यह स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा कि न्यायालय को गोपाल सेठ और सुशांत सेन की याचिका पर विचार नहीं करना चाहिए क्योंकि उनके दावों के विपरीत उनके नाम पिछले तीन साल में कभी भी मतदाता सूची से काटे नहीं गये।

उन्होंने कहा कि इस तरह की याचिका पर न्यायालय की कोई भी टिप्पणी निर्वाचन आयोग के खिलाफ जबर्दस्त प्रचार की तरह होगी जैसे वह कुछ गलत कर रहा था।पीठ ने कहा इस याचिका पर 28 मार्च को आगे सुनवाई की जायेगी।

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