Supreme Court में दायर हलफनामा, चुनावी बांड से बढ़ेगा कालेधन का इस्तेमाल

आयोग का मानना है पुराने प्रावधान में महज उन्हीं कंपनियों को राजनीतिक चंदा देने की छूट थी, जो मुनाफे में चल रही हों और जिनका रिकॉर्ड ठीक रहा हो। हलफनामे में आयोग ने कहा कि इस पुराने प्रावधान को ही वापस लाया जाए। बता दें कि चुनाव आयोग ने अपना जवाब एडीआर, माकपा सहित कई अन्य की तरफ से दायर याचिकाओं पर दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दो अप्रैल को सुनवाई करेगा।
कानून मंत्रालय को आगाह कर दिया था
आयोग ने हलफनामे में यह भी कहा कि उसने 26 मई, 2017 को ही कानून मंत्रालय को आगाह कर दिया था कि वित्त अधिनियम, 2017 के कुछ प्रावधान और उसके बाद आयकर अधिनियम, जन प्रतिनिधि कानून, और कंपनी अधिनियम में किए गए संशोधन से राजनीतिक दलों की फंडिग की पारदर्शिता प्रभावित होगी। आयोग ने कहा है कि इस संशोधन के कारण विदेशी स्रोतों से चंदा लेने पर प्रतिबंध में ढील दे दी गई। इससे राजनीतिक दलों को बिना जांच के विदेशी फंडिग लेने की इजाजत मिल गई। इस प्रावधान के जरिए भारतीय राजनीति पर विदेशी कंपनियों का प्रभाव बढ़ सकता है।