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गुरुवार, 28 मार्च 2019

Supreme Court में दायर हलफनामा, चुनावी बांड से बढ़ेगा कालेधन का इस्तेमाल

Supreme Court में दायर हलफनामा, चुनावी बांड से बढ़ेगा कालेधन का इस्तेमाल


Election Commission (logo)
Election Commission (logo)
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को चुनावी बांड के इस्तेमाल के विरोध में हलफनामा दाखिल किया। आयोग ने कहा कि चुनाव बांड के इस्तेमाल की इजाजत देने और राजनीति दलों को मिलने वाले चंदे की सीमा (कैप) हटाने से चुनावी प्रक्रिया में काले धन को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही इससे राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की पारदर्शिता भी प्रभावित होंगी। चुनाव आयोग ने हलफनामे में कहा कि यह पता लगाना मुश्किल है कि राजनीतिक दलों ने चंदा सरकारी कंपनियों से लिया है या विदेशी स्रोतों से। आयोग ने 15 मार्च को सरकार को पत्र लिखकर राजनीतिक फंडिग से संबंधित कानूनों में संशोधन करने की गुहार की थी। आयोग ने कहा कि वित्त अधिनियम, 2017 के जरिए किए गए इस संशोधन से चुनावी प्रक्रिया में काले धन का इस्तेमाल बढ़ेगा। फर्जी कंपनियों से राजनीतिक दलों को चंदा मिल सकता है। 

आयोग का मानना है पुराने प्रावधान में महज उन्हीं कंपनियों को राजनीतिक चंदा देने की छूट थी, जो मुनाफे में चल रही हों और जिनका रिकॉर्ड ठीक रहा हो। हलफनामे में आयोग ने कहा कि इस पुराने प्रावधान को ही वापस लाया जाए। बता दें कि चुनाव आयोग ने अपना जवाब एडीआर, माकपा सहित कई अन्य की तरफ से दायर याचिकाओं पर दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दो अप्रैल को सुनवाई करेगा। 

कानून मंत्रालय को आगाह कर दिया था 

आयोग ने हलफनामे में यह भी कहा कि उसने 26 मई, 2017 को ही कानून मंत्रालय को आगाह कर दिया था कि वित्त अधिनियम, 2017 के कुछ प्रावधान और उसके बाद आयकर अधिनियम, जन प्रतिनिधि कानून, और कंपनी अधिनियम में किए गए संशोधन से  राजनीतिक दलों की फंडिग की पारदर्शिता प्रभावित होगी। आयोग ने कहा है कि इस संशोधन के कारण विदेशी स्रोतों से चंदा लेने पर प्रतिबंध में ढील दे दी गई। इससे राजनीतिक दलों को बिना जांच के विदेशी फंडिग लेने की इजाजत मिल गई। इस प्रावधान के जरिए भारतीय राजनीति पर विदेशी कंपनियों का प्रभाव बढ़ सकता है। 

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