भाजपा में शामिल दो टीडीपी सांसदों पर चल रही है सीबीआई, ईडी और आयकर की जांच - Bharat news, bharat rajniti news, uttar pradesh news, India news in hindi, today varanasi newsIndia News (भारत समाचार): India News,world news, India Latest And Breaking News, United states of amerika, united kingdom

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शुक्रवार, 21 जून 2019

भाजपा में शामिल दो टीडीपी सांसदों पर चल रही है सीबीआई, ईडी और आयकर की जांच

भाजपा में शामिल दो टीडीपी सांसदों पर चल रही है सीबीआई, ईडी और आयकर की जांच

राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू को इस्तीफा देते टीडीपी सांसद वाईएस चौधरी, टीजी वेंकटेश और वाईएस चौधरी
राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू को इस्तीफा देते टीडीपी सांसद वाईएस चौधरी, टीजी वेंकटेश और वाईएस चौधरी - फोटो : bharat rajneeti
तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के चार राज्यसभा सांसद टीजी वेंकटेश, वाईएस चौधरी, जीएम राव और सीएम रमेश गुरुवार को भाजपा मे शामिल हो गए। इनमें से सीएम रमेश और वाईएस चौधरी उद्यमी हैं और उनके खिलाफ आयकर विभाग, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच चल रही है । रमेश का नाम पिछले साल सीबीआई के तत्कालीन निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच उपजे विवाद में आया था। उनकी कंपनी के खिलाफ आयकर विभाग की जांच चल रही है।

चौधरी बैंक से लिए कर्ज की धोखाधड़ी के आरोप में सीबीआई और ईडी के रडार पर हैं। हालांकि दोनों का दावा है कि वह निर्दोष हैं और उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। पिछले साल नवंबर में भाजपा सासंद और प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने चौधरी और रमेश को आंध्र प्रदेश के माल्या कहा था और राज्यसभा की नैतिकता समिति को उनके खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई करने की मांग की थी।

28 नवंबर को नैतिकता समिति के अध्यक्ष को लिखे पत्र को उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने लिखा था, 'मैंने  नैतिकता समिति से शिकायत की है कि टीडीपी के सांसद वाईएस चौधरी और सीएम रमेश को अयोग्य घोषित किया जाए। जिन्होंने बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटालों करके आंध्र के माल्या की संदिग्ध उपाधि अर्जित की है।' पिछले साल अक्तूबर में आयकर विभाग को जांच में रमेश से संबंधित एक कंपनी में 100 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन मिला था।

आयकर विभाग के अनुसार रित्विक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने पता न लगाए जाने वाले स्रोत से कथित तौर पर 74 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया था। वहीं 25 करोड़ रुपये के बिल संदिग्ध पाए गए थे। 12 अक्तूबर को आयकर विभाग ने हैदराबाद स्थित कंपनी और कडापा के घर में छापेमारी की थी। टीडीपी ने इन छापेमारी का विरोध किया था और इसे राजनीति से प्रेरित बताया था।

वर्मा और अस्थाना के बीच विवाद में मुख्य गवाह सना सतीश बाबू था। जिसके बयान के आधार पर वर्मा ने अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। बाबू ने आरोप लगाया था कि रमेश मामले को प्रभावित कर रहे हैं। इसके बाद सतीश ने अस्थाना की टीम को बयान दिया था कि वर्मा उससे घूस मांग रहे हैं। उसने आरोप लगाया था कि रमेश उसके खिलाफ मामला तय करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि वर्मा और अस्थाना की टीम ने इससे इनकार किया था।

चौधरी की बात करें तो वह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान राज्यमंत्री थे। उनपर तीन एफआईआर दर्ज है जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। इन एफआईआर में आरोप है कि इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माता बेस्ट और क्रॉम्पटन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने धोखे से बैंकों के एक संघ से 360 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज हासिल किया और फिर डिफॉल्ट (कर्ज चुकाने से चूकना) हो गए। सीबीआई का दावा है कि यह कंपनी चौधरी की है।

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