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Sunday, June 27, 2021

मंथन: जम्मू-कश्मीर के नेताओं संग बैठक के मायने क्या, राज्य में कब होंगे चुनाव?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सर्वदलीय बैठक से यह संदेश भी गया कि भारत जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली चाहता है, जिसके लिए वह सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर चल रहा है।
जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं के साथ केंद्र सरकार की सर्वदलीय बैठक शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। राज्य के किसी भी नेता ने इस बैठक से नाराजगी जाहिर नहीं की। सभी नेताओं ने राज्य में चुनाव की मांग की, जिस पर पीएम मोदी ने भी सहमति जताई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि परिसीमन के बाद राज्य में चुनाव कराए जाएंगे। अब पहला सवाल यह उठता है कि इस सर्वदलीय बैठक के मायने क्या निकले? ...और दूसरा सवाल है कि जम्मू-कश्मीर में अब चुनाव कब होंगे?

बैठक से बना सकारात्मक माहौल

विदेश मंत्रालय का मानना है कि इस सर्वदलीय बैठक से सकारात्मक माहौल बना। मंत्रालय के सूत्रों ने इसे दूरदर्शी रणनीति के साथ लिया गया फैसला करार दिया। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि साल भर पहले तक जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन का दावा किया जा रहा था। पाकिस्तान भी हमारे अंदरूनी मामले में बोल रहा था, लेकिन इस बैठक से उन्हें सही जवाब मिल गया है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक से जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत के बारे में पूरी दुनिया में बेहद सकारात्मक संदेश गया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इससे यह संदेश भी गया कि भारत जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली चाहता है, जिसके लिए वह सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर चल रहा है।

विरोधियों के पास नहीं बचा कोई मुद्दा

माना जा रहा है कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के बाद कांग्रेस पार्टी के पास भी आलोचना करने के लिए कुछ नहीं बचा। दरअसल, बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद भी गए थे। उन्होंने पांच सुझाव भी दिए, जिन्हें शांतिपूर्वक सुना गया। इसके अलावा विपक्ष के नेताओं के पास अनुच्छेद 370 और 35ए पर बोलने के सिवा कुछ खास नहीं था।

राज्य में कब होंगे चुनाव?

सर्वदलीय बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर में चुनाव पर अटकलें तेज हो गई हैं, लेकिन यह तय है कि चुनाव इतनी जल्दी भी नहीं होंगे। दरअसल, सूत्रों का कहना है कि राज्य में चुनाव परिसीमन के बाद ही होंगे, जिसके लिए सभी राजनीतिक दल भी सहमत हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो परिसीमन होने में पांच-छह महीने का समय लगना आम बात है। इसके बाद आपत्ति, सुझाव और दावा निस्तारण में भी समय लगेगा, जिसके लिए कमीशन बनाया जाएगा। ऐसे में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही पूरा होने में काफी समय लग सकता है। इसका अर्थ यह है कि राज्य में विधानसभा चुनाव की कोई भी स्थिति 2022 से पहले बनने के आसार नहीं हैं।

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