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Wednesday, July 7, 2021

जब शिवसेना के हमलों के आगे वाजपेयी बने दिलीप कुमार की ढाल, ‘निशान ए इम्तियाज’ को लेकर हुआ था बवाल

करोड़ों आखों को बुधवार की सुबह सुबह नम कर जाने वाले अभिनेता दिलीप कुमार पाकिस्तान से भारत आकर वैसे ही आ बसे जैसे हिंदी सिनेमा के तमाम दूसरे लोकप्रिय परिवार आकर बसे। हिंदी सिनेमा में उन्हें लाने की पहली कोशिश राज कपूर ने की। लेकिन उन्हें कैमरे के सामने लाने का सेहरा बंधा देविका रानी के सिर। अपने करियर में दिलीप कुमार तमाम किस्सों की वजह बने, लेकिन मुंबई शहर में उन्हें लेकर फसाद होने की नौबत तब आ गई थी जब पाकिस्तान की सरकार ने उन्हें अपने यहां का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘निशान ए इम्तियाज’ दिया। महाराष्ट्र में तब भी शिवसेना की मिली जुली सरकार थी। लेकिन, शिवसैनिकों के हंगामे के आगे दिलीप कुमार के लिए जैसे ही उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ढाल बनकर खड़े हुए, सारा मसला मिनटों में काफूर हो गया।

ये उन दिनों की बात है जब पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा था। कारगिल की चोटियों पर भारतीय सेना के तमाम जवान शहीद हो चुके थे। 1999 की गर्मियों में पाकिस्तान की सेना ने जो कुछ कारगिल में किया, उसके बाद मुंबई में दिलीप कुमार के घर के आगे धरने प्रदर्शन शुरू हो गए। शिवसेना ने दिलीप कुमार से मांग की कि वह पाकिस्तान सरकार से मिला ‘निशान ए इम्तियाज’ सम्मान लौटा दें। दिलीप कुमार को शुरू में लगा कि ये कुछ दिनों की बात है और मामला ठंडा पड़ जाएगा। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं।
दिलीप कुमार, अटल बिहारी बाजपेयी - फोटो : सोशल मीडिया
लगातार दबाव पड़ने पर दिलीप कुमार ने इसके बाद उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से समय मांगा। बाजपेयी ने उन्हें मुलाकात के लिए बुला भी लिया। दोनों के बीच करीब आधा घंटे तक बातचीत चलती रही। और, इस मुलाकात के बाद दिलीप कुमार जब बाहर निकले तो उनके चेहरे पर संतोष तो था ही एक हिंदुस्तानी होने का फख्र भी था। तब देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, ‘फिल्म स्टार दिलीप कुमार की देशभक्ति और देश के प्रति उनके समर्पण को लेकर कोई शक नहीं है।’

इसके अलावा वाजपेयी की तरफ से एक आधिकारिक बयान भी जारी किया गया। जिसके मुताबिक, दिलीप कुमार ने अपने पूरे फिल्मी करियर में देशभक्ति और देश के प्रति अपने समर्पण को साबित किया है। ये अब उनके ऊपर है कि वह व्यक्तिगत हैसियत में मिले इस पुरस्कार को रखना चाहते हैं कि नहीं। किसी को उनके ऊपर इसे वापस करने का दबाव नहीं बनाना चाहिए।”
दिलीप कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
इसी के बाद दिलीप कुमार ने ‘निशान ए इम्तियाज’ न लौटाने का फैसला किया। और, प्रधानमंत्री के बयान के बाद यहां मुंबई में शिवसेना के हौसले भी पस्त हो गए। इसके बाद फिर कभी किसी मसले पर दिलीप कुमार के ऊपर ‘निशान ए इम्तियाज’ को लेकर कोई तोहमत नहीं लगी। बताते हैं कि प्रधानमंत्री वाजपेयी से मुलाकात के लिए जो चिट्ठी दिलीप कुमार ने लिखी थी, उसमें उन्होंने लिखा, अगर इससे देश का हित होता है तो वह ‘निशान ए इम्तियाज’ लौटाने को तैयार हैं।