कर्नाटक का नाटक : BJP का खेल(Game) बिगाड़ सकते हैं विधानसभा अध्यक्ष
रमेश कुमार
खास बातें
- 225 सदस्यों की है कर्नाटक की वर्तमान विधानसभा
- 104 विधायकों के साथ विधानसभा में सबसे बड़ा दल है भाजपा
- 79 सदस्य हैं सत्ताधारी गठबंधन में कांग्रेस के और 37 सदस्य हैं जेडीएस के
- 02 निर्दलीय विधायकों ने सरकार से समर्थन लिया है वापस
- 117 सदस्यों (स्पीकर समेत) के समर्थन का दावा कर रहे सीएम कुमारस्वामी
- 09 विधायकों के अपने पक्ष में आने का दावा किया है भाजपा ने
कर्नाटक में चल रहा सियासी नाटक धीरे धीरे निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस-जेडीएस के गठबंधन वाली कुमारस्वामी सरकार से दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद अब सभी निगाहें शुक्रवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर हैं। भाजपा को आशंका है कि कांग्रेस खेमे के विधानसभा अध्यक्ष इस बैठक से दूर रहने वाले विधायकों का मताधिकार छीन सकते हैं। ऐसे में विधानसभा में मतविभाजन की स्थिति में भाजपा का सत्ताधारी गठबंधन को अल्पमत साबित करने का खेल बिगड़ सकता है।
दरअसल भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि कांग्रेस ने सरकार बचाने की नीति के तहत शुक्रवार की बैठक बुलाई है। एक तरफ कांग्रेस घोषित रूप से अपने नाराज विधायकों को अगले मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद देने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर इस बैठक के जरिए अपने पक्ष में खड़े विधायकों की वास्तविक संख्या जानना चाहती है। इस बैठक से गायब रहने पर असंतुष्ट विधायकों की पहचान कांग्रेस के सामने खुल सकती है और उन्हें विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान विधानसभा अध्यक्ष बागी घोषित कर मताधिकार से वंचित रख सकते हैं।
इस पूरी रणनीति में पहले भी संकटमोचक साबित हो चुके डी. शिवकुमार की भूमिका अहम मानी जा रही है। हालांकि भाजपा ने इसकी भनक लगने के बाद ही गुरुग्राम में अपने 104 विधायकों को रखने वाले भाजपा नेतृत्व ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा को बंगलुरू भेजने का फैसला किया है। हालांकि विधायकों से मताधिकार छिनने की स्थिति में भाजपा के पास अदालत का रुख करने का विकल्प रहेगा, लेकिन फिलहाल कुमारस्वामी सरकार सुरक्षित साबित हो जाएगी।