Gandhi Nagar रैली में बोले उद्धव, Amit भाई BJP-Shivsena का दिल मिला, पीछे से वार संस्कार में नहीं

विपक्ष के गठबंधन में दिल मिले या न मिले वे हाथ मिला रहे हैं पर भाजपा-शिवसेना का दिल मिल गया है। हमने यही सोचा कि पिछले पांच साल में जो हुआ हो गया पर उससे पिछले 25 से 30 साल में क्या हो रहा था। अकाली दल को छोड़ कर अन्य सभी दल भाजपा और शिवसेना को अछूत मानते थे। पता नहीं कैसे 25 साल गुजर गए। हमारा सपना सच्चाई बना। दिल्ली के तख्त पर भगवा लहरा गया। हमारा नेता एक है। विपक्ष को पूछना चाहता हूं कि आपका नेता कौन है। हमें भी सत्ता चाहिए पर हम कुर्सी के लिए पागल नहीं हो गये हैं। यहां जैसे भीड़ मोदी-मोदी जी के नारे लगा रही है वैसे विपक्ष से बोलो कि एक नेता का नारा लगाये। उनमें न कोई सोच एक जैसी है और न एकता। हर नेता सोचता है कि वही प्रधानमंत्री बने। जब पहले ही ऐसी टांग खचाई होगी तो वे आगे कैसे बढ़ सकते हैं। अमित भाई मै आया हूं मेरे पिता जी ने सिखाया है कि जिसकी भी मदद करो दिल खोल कर करो। पीछे से वार के हमारे संस्कार नहीं है।"
2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के ठीक बाद ही दोनों के रिश्ते बिगड़ने लगे थे। पहले केंद्र में हिस्सेदारी को लेकर और फिर राज्य के स्तर पर। शिवसेना, महाराष्ट्र के भीतर सत्ता में बेहतर भागीदारी चाहती थी, मुख्यमंत्री की कुर्सी चाहती थी। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो तल्खी और बढ़ गई। बीते साल एक वक्त ऐसा भी आया, जब शिव सेना ने एलानिया तौर पर कह दिया कि 2019 के चुनाव में वो अकेले उतरने वाली है। लेकिन जब 2019 आ ही गया और भाजपा की तरफ से रिश्ते सुधारने की कोशिश हुई तो पुराना मैल काफी हद तक धुल गया। अमित शाह ने उद्धव से, मातोश्री जाकर मुलाकात की, गुलदस्ते भेंट करने की तस्वीरें मीडिया में आईं और साथ आए गठबंधन के बयान।
महाराष्ट्र में अब दोनों पार्टियां मिल कर लड़ रही हैं। महाराष्ट्र की कुल 48 सीटों में से 25 सीटों पर भाजपा तो 23 पर शिव सेना लड़ेगी।