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सोमवार, 1 अप्रैल 2019

Tamil सियासत के पेच

Tamil सियासत के पेच


सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर 
तमिलनाडु में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के अलावा इस बार कई पार्टियां मैदान में हैं। इसी कारण अन्नाद्रमुक के खिलाफ माहौल के बावजूद द्रमुक को लाभ मिलता नहीं दिखता, फिर मतदाताओं के पास विकल्प भी अधिक हैं। भारतीय राजनीति में भाजपा और कांग्रेस बड़ी पार्टी हो सकती हैं, पर जब तमिलनाडु की सियासत की बात करते हैं, तब ये दोनों पार्टियां हमेशा क्षेत्रीय द्रविड़ दिग्गजों-अन्नाद्रमुक और द्रमुक पर निर्भर रहती हैं। अगर कोई आगामी चुनाव के लिए हुए गठबंधन पर नजर डालेगा, तो पाएगा कि यह प्रवृत्ति जयललिता और करुणानिधि के युग से लेकर उनके निधन के बाद भी जारी है। राज्य में दो बड़े गठबंधनों का गठन हो चुका है, जिनमें से एक का नेतृत्व अन्नाद्रमुक कर रही है, तो दूसरे का द्रमुक। चालीस सीटों (तमिलनाडु की 39 और पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी की एक) में से दोनों पार्टियों-अन्नाद्रमुक और द्रमुक ने अपने पास बीस-बीस सीटें रख ली हैं और बाकी सीटें सहयोगियों में बांट दी हैं।

अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन में रामदौस की पीएमके सात सीटों (एक राज्यसभा की सीट का भी प्रस्ताव दिया गया है) पर चुनाव लड़ रही है, भाजपा पांच पर, अभिनेता से राजनेता बने विजयकांत की डीएमडीके चार पर, पूर्व कांग्रेसी नेता जीके वासन की टीएमसी, डॉ. कृष्णासामी की पीटी, एसी शनमुघम की एनजेपी और पुड्डुचेरी में एनआर कांग्रेस एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेगी। ऐसे ही द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन में कांग्रेस दस सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि विदुथलई चिरुथइगल काची, माकपा और भाकपा में से प्रत्येक को दो-दो सीटें दी गई हैं।

इसके अलावा वाइको के एमडीएमके,आईजेके, आईयूएमएल और केडीएमके को एक-एक सीट दी गई है। द्रमुक ने एमडीएमके को राज्यसभा की एक सीट देने का भी वादा किया है।दिलचस्प बात यह है कि राज्य में पहली बार लोकसभा चुनाव के साथ ही 18 अप्रैल को तमिलनाडु में एक मिनी विधानसभा चुनाव (18 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव) भी होना है। अन्नाद्रमुक को सत्ता में बने रहने के लिए और आठ वर्षों से सत्ता से बाहर द्रमुक को अन्नाद्रमुक को सत्ता से बेदखल करने के लिए इनमें से अधिकाधिक सीटें जीतने की जरूरत है।हालांकि पहले की ही तरह मुख्य मुकाबला अन्नाद्रमुक और द्रमुक के बीच है, लेकिन इस बार दो उल्लेखनीय और नए खिलाड़ी भी उभरे हैं। वे हैं दिनाकरन की एएमएमके और अभिनेता कमल हासन की एमएनएम।

उम्मीद है कि ये दोनों पार्टियां उन्हीं वोटों में सेंध लगाएंगी, जो या तो द्रमुक, या अन्नाद्रमुक या उनके गठबंधन सहयोगियों को दिए जाएंगे। इसके अलावा इस दौड़ में फिल्म निर्माता से राजनेता बने सीमान की नाम तमीझर काची भी हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नाद्रमुक और द्रमुक का पारंपरिक वोट बैंक बरकरार रहेगा, लेकिन तटस्थ और युवा मतदाता, जिनका वोट इन पार्टियों में से एक की हार-जीत का फैसला करेगा, कमल, दिनाकरन या सीमान को वोट दे सकते हैं।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि दिनाकरन ने अन्नाद्रमुक के उन समर्थकों को आकर्षित किया है, जो पार्टी के मौजूदा नेतृत्व (मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और उप मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेलवम) से निराश हैं। कमल हासन ने युवाओं,महिलाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं से अपने भावनात्मक संबंध जोड़े हैं। ऐसे ही सीमान को उन युवाओं का समर्थन प्राप्त है, जो तमिल समर्थक मानसिकता के हैं। अब तक मतदाताओं के पास अन्नाद्रमुक या द्रमुक के अलावा और ज्यादा विकल्प नहीं थे, लेकिन इस बार उनके पास आकर्षक विकल्प हैं।

वर्ष 2004 का लोकसभा चुनाव, जिसमें द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन ने राज्य में विपक्षी पार्टियों का सूपड़ा साफ कर दिया था और 2014 का लोकसभा चुनाव, जिसमें अन्नाद्रमुक अकेले लोकसभा की 37 सीटें जीतकर देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, की तरह इस बार कोई लहर नहीं है। इसलिए इस बार वोटों का बंटवारा होगा। और इसमें दिनकरन, कमल और सीमान की भूमिका प्रमुख होगी। हो सकता है, वे न जीतें, लेकिन खेल खराब कर सकते हैं।

इसकी चुभन द्रमुक या अन्नाद्रमुक को साफ महसूस होगी। जाहिर-सी बात है कि जो लोग अन्नाद्रमुक और भाजपा से निराश हैं, वे इस बार सिर्फ द्रमुक गठबंधन को ही वोट नहीं देंगे। उनका वोट दिनाकरन और कमल के बीच भी बंट सकता है।इसलिए इसका फायदा द्रमुक को नहीं होने वाला। इसके बजाय वोट बंटने से अन्नाद्रमुक को ही फायदा होगा। इसी तरह, जो लोग द्रमुक और कांग्रेस से निराश हैं, वे अन्नाद्रमुक को ही वोट नहीं देंगे, बल्कि वे एमएनएम और एएमएमके को भी वोट दे सकते हैं।

कुछ जनमत सर्वेक्षणों में द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन की, तो कुछ में अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन की जीत की भविष्यवाणी की गई है, इसलिए दोनों खेमे आशावादी लग रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से ज्यादा समय से पूरे राज्य का दौरा कर रहे मुख्यमंत्री पलानीस्वामी कहते हैं कि द्रमुक और कांग्रेस भ्रष्ट है, जबकि अन्नाद्रमुक और भाजपा लोगों की सेवा कर रही है। राष्ट्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे एक मजबूत नेतृत्व की जरूरत है और वह सत्ता में वापसी करेंगे। 

दूसरी ओर, द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन मुख्यमंत्री के दावे को खारिज करते हुए कहते हैं कि लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि असली भ्रष्ट कौन है। तमिलनाडु कभी भी सांप्रदायिक ताकतों के पक्ष में नहीं रहा है। इस बार भी मतदाता इसे साबित करेंगे और हमारे धर्मनिरपेक्ष गठबंधन के लिए मतदान करेंगे।वहीं कमल हासन का दावा है कि हम द्रमुक और अन्नाद्रमुक का सही 
विकल्प हैं। इन दोनों ने दशकों से सत्ता में रहने के बावजूद राज्य के लिए कुछ नहीं किया।लेकिन हम अपने वादे पूरे करेंगे और उन्हें हकीकत में बदलेंगे।

आने वाले दिनों में यह चुनावी लड़ाई और तेज होगी।यह चुनाव स्टालिन, पलानीस्वामी और पन्नीरसेलवम का राजनीतिक भविष्य तय करेगा, जो अपनी पार्टियों के बड़े और करिश्माई नेताओं की अनुपस्थिति में चुनावी समर का सामना कर रहे हैं। इनके अलावा कमल हासन,दिनाकरन और सीमान जैसे नए खिलाड़ियों का भी भविष्य इस चुनाव से तय होगा।

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