सियासी दांव: Indira और Sonia की तरह Rahul Gandhi ने भी किया दक्षिण का रुख, Amethi में लग रहा डर!
इंदिरा और सोनिया की तरह राहुल भी चले दक्षिण की राह
खास बातें
- केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ेंगे कांग्रेस अध्यक्ष
- सोनिया और इंदिरा गांधी भी दक्षिण भारत से लड़ चुकी हैं
- अमेठी लोकसभा सीट से तीन बार से सांसद हैं राहुल गांधी
- साल 2014 में अमेठी में स्मृति ईरानी ने दी थी कड़ी टक्कर
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी परंपरागत सीट अमेठी के अलावा केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ेंगे। आज नामांकन के बाद उनका मेगा रोड शो भी होगा। वायनाड से चुनाव लड़ने को, एक तरफ कांग्रेस की दक्षिण साधने की रणनीति बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर भाजपा खेमा इसे कांग्रेस का डर बता रही है। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो वायनाड सीट से चुनाव लड़ने का फैसला राहुल गांधी और पार्टी ने दक्षिण भारत में कांग्रेस की स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से लिया है। कांग्रेस वायनाड सीट के जरिए केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करना चाहती है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी रविवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यही बात कही कि वायनाड सीट से राहुल गांधी तीनों राज्यों का प्रतिनिधित्व कर पाएंगे।
अक्सर राहुल गांधी पर बयानी तौर पर हमलावर रहीं स्मृति ईरानी ने गुरुवार को एक बार फिर से उन पर तंज कसा। कहा कि राहुल गांधी अमेठी छोड़ कर भाग रहे हैं, यह अमेठी की जनता का अपमान है। मालूम हो कि राहुल गांधी अबतक सिर्फ अमेठी से ही चुनाव लड़ते रहे हैं। वह लगातार तीन बार से उत्तर प्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।
2014 में अमेठी में दिखा था मोदी लहर का असर
कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह भी बता रहे हैं कि अमेठी में हार की आशंका को देखते हुए राहुल गांधी ने कांग्रेस की सुरक्षित सीट वायनाड से भी चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। श्री राम स्वरुप मेमोरियल(एसआरएम) विश्वविद्यालय, लखनऊ में सहायक प्रोफेसर प्रेम कुमार कहते हैं कि कांग्रेस के लिए 2009 तक की सियासी तस्वीर कुछ और थी। 2009 लोकसभा चुनाव में करीब साढ़े तीन लाख वोटों से जीतने वाले राहुल गांधी पर 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर भारी पड़ी थी। पिछली बार स्मृति ईरानी उनके खिलाफ मैदान में थी और उनसे राहुल की जीत का अंतर घटकर करीब एक लाख वोटों का रह गया था।
प्रेम कहते हैं कि देश के राजनीतिक माहौल में इस बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का असर रहने वाला है और अमेठी में पिछली तस्वीर बदल जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। इस बार अमेठी के बगल सुल्तानपुर संसदीय सीट से मेनका गांधी मैदान में हैं और इसका असर भी वहां पड़ सकता है। शायद इन वजहों से भी राहुल गांधी ने दो जगह से चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाई है।
रायबरेली के अलावे बेल्लारी से चुनाव लड़ी थीं सोनिया गांधी
इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी भी चल चुकी हैं दक्षिण चाल
दो सीटों पर चुनाव लड़ने का ट्रेंड नया नहीं है। पिछली बार नरेंद्र मोदी ने भी गुजरात की वड़ाेदरा के अलावा उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट से भी मैदान में उतरे थे और जीते भी। उन्होंने गुजरात की सीट छोड़ उत्तर प्रदेश की वाराणसी को चुना।
दक्षिण भारत का रुख करने वाले राहुल गांधी कोई पहले नेता नहीं हैं। उनसे पहले उनकी मां सोनिया गांधी और दादी इंदिरा गांधी भी दक्षिण भारत का रुख कर चुकी हैं। साल 1977 में रायबरेली से हारने के बाद इंदिरा ने चिकमंगलूर का रुख किया था। साल 1978 के उपचुनाव में वहां से जीत हासिल की थी। वहीं, सोनिया गांधी भी कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए रायबरेली के अलावा कर्नाटक के बेल्लारी से चुनाव लड़ चुकी हैं।
बेल्लारी लोकसभा सीट वैसे तो कांग्रेस का ही गढ़ रही थी और और यहां हुए 18 लोकसभा चुनावों में 15 बार कांग्रेस चुनाव जीत चुकी है। साल 1999 में सोनिया गांधी ने यहां से चुनाव लड़ा था और 56 हजार वोटों के अंतर से भाजपा उम्मीदवार सुषमा स्वराज को शिकस्त दी थी। हालांकि सोनिया ने बाद में यह सीट छोड़ दी और उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट का प्रतिनिधित्व किया। पिछले डेढ़ दशक से भाजपा यह सीट जीत रही है।
केरल के वायनाड सीट का ये है राजनीतिक गणित
2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए केरल की वायनाड सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। एमआई शनवास दो बार से यहां के सांसद हैं और भाजपा यहां दौड़ में नहीं है। 2014 में एमआई शनवास ने सीपीआई को हराकर इस सीट पर पहली बार जीत दर्ज की थी। उन्हें तीन लाख 77 हजार 035 वोट मिले थे, जबकि सीपीआई के सत्यान मोकेरी को तीन लाख 56 हजार 165 वोट मिले। हार का अंतर काफी कम रहा था। यही कारण है कि राहुल गांधी के उम्मीदवार घोषित होते ही लेफ्ट कांग्रेस पर भड़की हुई है और विरोध कर रही है।
वायनाड में पिछले चुनाव के वोट शेयर देखें तो कांग्रेस को 41.21 फीसदी मिले थे, वहीं सीपीआई को करीब 39 फीसदी, जबकि भाजपा को महज नौ फीसदी वोट मिले थे। सीपीआई इस बार भी कड़ा मुकाबला देने वाली थी, लेकिन राहुल गांधी को उम्मीदवार उतार कर कांग्रेस ने दक्षिण चाल खेल दिया है।