मैनपुरी सीट पर कितने दमदार हैं Mulayam Singh Yadav, क्या कहते हैं जातीय समीकरण?

खास बातें
।2014 के आंकड़ों के अनुसार इस सीट पर करीब 16 लाख वोटर हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर का असर मैनपुरी की सीट पर देखने के नहीं मिला था। मुलायम सिंह के सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में उनके पोते तेजप्रताप को 65 प्रतिशत वोट मिले थे। मुलायम सिंह यादव ने 2004 में भी मैनपुरी से जीतने के बाद सीट छोड़ी थी। जिसके बाद धर्मेंद्र यादव यहां से उपचुनाव जीते थे। लेकिन मुलायम सिंह ने 2009 यहां से जीतने के बाद सीट को अपने पास ही रखा था।
इस बार यादव परिवार का कुनबा बिखर गया है। क्योंकि मैनपुरी लोकसभा सीट के अंतर्गत ही जसंवतनगर विधानसभा आती है। जो मुलायम सिंह के भाई शिवपाल यादव का विधानसभा क्षेत्र है। ऐसे में यादव वोटरों का बिखरना संभव है। कहने को वो कह चुके हैं कि मैनपुरी में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे लेकिन जिस तरह से शिवपाल, नामांकन के वक्त भी नदारद रहे, वो बढ़ी हुई दूरियों को दिखाता है। साथ ही जिस सूबे में उनकी पार्टी 79 सीटों पर मजबूती से लड़ने का दम भर रही हो, वहां मैनपुरी पर इसका बिल्कुल असर नहीं होगा, ऐसा मुश्किल लगता है।