असम पुलिस की गलती के कारण तीन साल तक डिटेंशन कैंप में रही 59 साल की महिला

डे ने कहा कि मोहम्मद सनाउल्लाह मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई की। सनाउल्लाह भारतीय सेना में कार्यरत रहे हैं। उन्होंने कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था। उन्हें मई में विदेशी घोषित कर दिया गया था। इस समय वह जमानत पर बाहर हैं। सिंह ने दावा किया कि तीन महीने पहले उन्हें 59 साल की मधुबाला को गलत तरीके से नजरबंद करने के बारे में शिकायत मिली।
सिंह ने कहा, 'मैंने एक जांच बैठाई और पता चला कि यह गलत पहचान का मामला है और गलत मधुबाला दास को नजरबंद किया गया है। मैंने मुख्यालय को इसकी जानकारी दी और सुधारात्मक कार्रवाई के लिए चिरांग के विदेशी ट्रिब्यूनल गए।' जब उनसे पूछा गया क्या गलत शख्स को हिरासत मे लेने के लिए जिम्मेदार अधिकारी को फटकार लगाई या अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई तो इसके जवाब में सिंह ने कहा कि पहली प्राथमिकता मधुबाला को न्याय दिलाना था।
असम में इस समय 100 विदेश ट्रिब्यूनल हैं। एक अर्ध-न्यायिक निकाय जो नागरिकता निर्धारित करते हैं। वर्तमान में 1000 लोगों को विदेशी घोषित किया गया है जो राज्य में स्थित छह डिटेंशन केंद्र में रह रहे हैं।