जम्मू-कश्मीर: नेताओं की नींद उड़ाने वाले परिसीमन पर चर्चा करेंगे अमित शाह और सत्यपाल मलिक - Bharat news, bharat rajniti news, uttar pradesh news, India news in hindi, today varanasi newsIndia News (भारत समाचार): India News,world news, India Latest And Breaking News, United states of amerika, united kingdom

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बुधवार, 26 जून 2019

जम्मू-कश्मीर: नेताओं की नींद उड़ाने वाले परिसीमन पर चर्चा करेंगे अमित शाह और सत्यपाल मलिक

जम्मू-कश्मीर: नेताओं की नींद उड़ाने वाले परिसीमन पर चर्चा करेंगे अमित शाह और सत्यपाल मलिक

अमित शाह और सत्यपाल मलिक (फाइल फोटो)
अमित शाह और सत्यपाल मलिक (फाइल फोटो) - फोटो : bharat rajneeti
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कश्मीर दौरे में परिसीमन पर भी चर्चा होगी। हालांकि इस पर अभी अधिकारिक तौर से कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन गृह मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि अमित शाह इस मुद्दे पर राज्यपाल, उनके सलाहकार और राज्य की भाजपा इकाई के कुछ नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। अमित शाह बुधवार दोपहर बाद बीएसएफ के हवाईजहाज से श्रीनगर पहुँचेंगे। यहाँ से वे सीधे राजभवन जाएँगे। 
बता दें कि जम्मू-कश्मीर की भाजपा इकाई ने पिछले दिनों राज्यपाल सत्यपाल मलिक के मार्फत गृह मंत्रालय को परिसीमन का एक कच्चा ड्राफ्ट भेजा था। हालांकि मंत्रालय के स्तर पर इसे सुझाव पत्र का नाम दिया गया है। बाद में परिसीमन के मामले में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकारों से भी एक अलग रिपोर्ट मांगी गई थी। इस बाबत अमित शाह राज्यपाल सत्यपाल से चर्चा करेंगे। इससे पहले गृहमंत्री स्थानीय भाजपा नेताओं से मुलाकात कर उनका मन टटोलेंगे। 

खास बात है कि जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेताओं की रिपोर्ट में वहां पर जल्द से जल्द परिसीमन कराने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट के अलावा भाजपा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता यह बात सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि राज्य में परिसीमन अब समय की मांग है। अगर मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में परिसीमन होता है तो जम्मू-कश्मीर के अलावा लद्दाख क्षेत्र के साथ भी न्याय हो सकेगा। वहां पर विधानसभा की कई नई सीटें बन सकती हैं। 

गुप्ता के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की 111 सीटें हैं।मौजूदा स्थितियों में केवल 87 सीटों पर चुनाव लड़ा जाता है। वहां के संविधान के सेक्शन-47 के अनुसार, 24 सीटों पर चुनाव नहीं होता है। ये सीटें खाली रहती हैं। यहां बता दें कि जब जम्मू-कश्मीर का संविधान बना तो 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए खाली छोड़ी गई थी। राज्य के भाजपा नेताओं ने परिसीमन को लेकर जो रिपोर्ट दी है, उसमें इन्हीं 24 सीटों का जिक्र है।

ये हैं परिसीमन के राजनीतिक मायने

इसके राजनीतिक मायने लगायें तो अर्थ कुछ और निकलता है। ये सीटें परिसीमन के तहत अगर जम्मू क्षेत्र या कुछ सीट लद्दाख क्षेत्र में जोड़ दी जाती हैं तो इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। ऐसी स्थिति में भाजपा अपने दम पर राज्य में सरकार बना सकती है। जम्मू-कश्मीर में 1995 के बाद से कोई परिसीमन नहीं हुआ है।

 राज्य का संविधान कहता है कि हर 10 साल में परिसीमन हो। इस बाबत तत्कालीन मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने 2002 में यह नियम बना दिया था कि जेएंडके में 2026 तक परिसीमन नहीं होगा। चूंकि उस वक्त राज्य में भाजपा की स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए फारुक अब्दुल्ला की इस कार्रवाई का विरोध नहीं हो सका। भाजपा का प्रयास है कि संविधान के दायरे में इस परिसीमन को जल्द करा दिया जाए। यानी किसी तरह विधानसभा चुनावों से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

परिसीमन को लेकर राजनीतिक दलों में मची जबरदस्त खलबली

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जैसे ही यह खबर मिली कि भाजपा इस बार परिसीमन पर गम्भीरता से विचार कर रही है तो उन्होंने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। 

उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों को फिर से तैयार करने की भारत सरकार की योजना के बारे में सुनकर परेशान हूं। राज्य में परिसीमन की कोई जरूरत नहीं है। परिसीमन राज्य के एक और भावनात्मक विभाजन को सांप्रदायिक आधार पर भड़काने का स्पष्ट प्रयास है। 

वे नहीं पर नहीं रुकी, उन्होंने कहा, भारत सरकार पुराने घावों को भरने की बजाए, परिसीमन का मुद्दा लाकर कश्मीरियों का दर्द बढ़ा रही है। सूत्र बताते हैं कि नेशनल कॉफ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने इस मसले पर आपसी बातचीत की है। 

इनकी योजना है कि परिसीमन का विरोध करने के लिए कांग्रेस पार्टी को भी साथ लेना होगा। फारुक अब्दुल्ला इस बाबत कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद से बातचीत कर रहे हैं। ये सभी नेता इस बात से भलीभाँति वाकिफ हैं कि जम्मू कश्मीर में अब परिसीमन होता है तो वह निश्चित तौर पर भाजपा के पक्ष में जाएगा।

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