ईडी का डीके शिवकुमार को लेकर खुलासा, बताया- परिवार, सहयोगियों के पास हैं 317 बैंक खाते

अदालत ने पाया कि ईडी की जांच को ऐसे समय पर नहीं रोकना चाहिए जब आरोपी के खिलाफ साक्ष्य मौजूद हैं। अदालत ने कहा, 'ईडी यह सुनिश्चित करे कि आरोपी अपनी सभी जरूरी दवाएं ले। हर 24 घंटे में या उससे पहले और जब आवश्यकता पड़े तब उसका परीक्षण किया जाए।' जज कुहार ने शिवकुमार को रोजाना आधे घंटे के लिए अपने पारिवारिक डॉक्टर के अलावा परिवार के सदस्यों से भी मिलने की इजाजत दे दी।
ईडी ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल केएम नटराज के जरिए शिवकुमार की पांच दिनों की कस्टडी मांगी थी। जिसमें हिरासत के समय हुए नए खुलासों का हवाला दिया गया था। विशेष अभियोजक एनके मत्ता के माध्यम से दायर की गई रिमांड याचिका में कहा गया है कि हिरासत में पूछताछ के दौरान शिवकुमार ने टाल-मटोल वाला रवैया अपनाया। कथित धनराशि को एजेंसी ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बताया।
एजेंसी ने कहा कि विशिष्ट प्रश्नों के जवाब देने की बजाए शिवकुमार ने एजेंसी का समय बर्बाद किया। इसके अलावा उन्होंने सवालों का जवाब देने के लिए लंबा समय लिया और थकने और नींद आने के आधार पर कई ब्रेक लिए। हालांकि एजेंसी का कहना है कि उसे जांच में पर्याप्त प्रगति मिली है। ईडी ने आरोप लगाया है कि जांच में यह पता चला है कि शिवकुमार ने विधायक और कर्नाटक सरकार में मंत्री के अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़ी मात्रा में पैसा बनाया।