वैश्य-जाट कार्ड से राजस्थान-बिहार के कई नेताओं के भविष्य पर ग्रहण, भाजपा ने यूं ही नहीं लगाया दांव

खास बातें
चूंकि डिप्टी सीएम के पद पर वैश्य बिरादरी के सुशील कुमार मोदी हैं, ऐसे में राजपूत बिरादरी के राधामोहन और रूडी को मौका मिलने की उम्मीद थी। यह भी माना जा रहा था कि यादव बिरादरी के नित्यानंद राय के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद राजद के इसी बिरादरी के वोट बैंक में सेंध लगाने केलिए संगठन की कमान रामकृपाल को दी जा सकती है।
अब जबकि नेतृत्व ने वैश्य बिरादरी के ही जायसवाल को अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है, तब इन नेताओं के लिए मुश्किलों का दौर शुरू होने वाला है। चूंकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिहार की पर्याप्त उपस्थिति है, इसलिए निकट भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में भी इनके शामिल होने की संभावना कम है।
बिहार की तर्ज पर भाजपा नेतृत्व ने राजस्थान में पूनिया को अध्यक्ष बना कर सबको चौंकने पर मजबूर किया। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान सांसद राज्यवर्धन राठौर को राज्य संगठन की कमान दी जाएगी। हालांकि इस पद की दौरान में राजेंद्र राठौर भी शामिल थे।
अध्यक्ष मदन लाल सैनी के निधन के बाद माना जा रहा था कि पार्टी दलित या राजपूत बिरादरी में से किसी को संगठन की कमान देगी। सूत्रों का कहना है कि जाट बिरादरी को अध्यक्ष बनाने के पीछे उद्येश्य इस बिरादरी में कद्दावर नेतृत्व को उभारना है। जिसका लाभ हरियाणा, पश्चिम उत्तर के साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश के के जाट बहुल इलाकों में लिया जा सके।