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Friday, October 4, 2019

कांग्रेस उन परिवारों के सहारे जो पिछला चुनाव हारे, नहीं चला एक परिवार-एक टिकट का फार्मूला

कांग्रेस उन परिवारों के सहारे जो पिछला चुनाव हारे, नहीं चला एक परिवार-एक टिकट का फार्मूला

Congress with the help of those families who lost the last election
हरियाणा में उम्मीदवार तय करने में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की हनक साफ दिखाई दी। यही कारण है कि हरियाणा कांग्रेस में टिकट बंटने से पहले ही घमासान शुरू हो गया था जो विधानसभाओं में सड़क पर भी दिखाई दे रहा है। बताते हैं राज्य की 90 सीटों में करीब 60 सीट हुड्डा खेमे के पास गई हैं। कांग्रेस ने एक दर्जन से अधिक ऐसे परिवारों को टिकट दिया है जो पिछला चुनाव हार चुके हैं। पार्टी ने चेहरा बदलकर उनके बच्चों को मैदान में उतारा है। एक परिवार एक टिकट का फार्मूला नहीं चला। वरिष्ठ नेताओं ने अपनी नई पीढ़ी को आगे कर उन्हें टिकट दिलाया है। कुछ टिकट दूसरे दलों के नेताओं की सिफारिश पर भी दिए गए हैं।

राजनीतिक घरानों में चौधरी भजन लाल के दोनों बेटों कुलदीप विश्रोई और चंद्रमोहन को टिकट मिला है। चंद्रमोहन कालका से दावेदारी कर रहे थे उन्हें पंचकुला से उतारा गया है। चौधरी बंशीलाल के परिवार से तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। बहू किरण चौधरी, बड़ा बेटा रणवीर महेंद्रा और दामाद सोमवीर सिंह को टिकट मिला है।

पूर्व मंत्रियों में महेंद्र प्रताप के बेटे विजय प्रताप और शिवचरण शर्मा के बेटे नीरज शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है। पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह चट्टा के बेटे मनदीप सिंह चट्टा, फूलचंद मौलाना के बेटे वरुण चौधरी फिर मैदान में हैं। केवी सिंह के बेटे अमित सिहाग भी मैदान में हैं हालांकि अमित युवा कांग्रेस से जुड़े रहे हैं।

कांग्रेस टिकट बंटवारे में लालू प्रसाद यादव और शरद यादव को भी खुश किया है। कैप्टन अजय यादव के बेटे चिरंजीव राव लालू यादव के दामाद हैं। बताते हैं कि कमलवीर यादव का टिकट शरद यादव के कहने पर दिया गया है। इनेलो से आए नेताओं में अशोक अरोड़ा, प्रदीप चौधरी और सुभाष देशवाल को भी पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर की नाराजगी और दबाव का कारण साफ है। उनके दो समर्थक ही टिकट पा सके हैं। जबकि तंवर ने कांग्रेस अध्यक्ष को राज्य भर के 84 उम्मीदवारों की सूची भेजी थी। उन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपने भेजे गए नामों को जमीनी नेता बताया था।

प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा भी अपने तमाम समर्थकों को टिकट नहीं दिला पाई हैं। हालांकि उनके खेमे के करीब एक दर्जन नामों को प्रमुखता दी गई। किरण चौधरी, कुलदीप विश्रोई, रणदीप सुरजेवाला भी अपने टिकट के अलावा एक-दुक्का नाम ही उम्मीदवारी में बदलवा सके हैं।