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Thursday, January 16, 2020

कौन है करीम लाला- जिससे इंदिरा गांधी के मिलने के दावे से फैली सियासी सनसनी

शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर बुधवार को बड़ा बयान दिया था. एक इंटरव्यू में संजय राउत ने दावा किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला से मिलने के लिए मुंबई आया करती थीं.
जिससे इंदिरा गांधी के मिलने के दावे से फैली सियासी सनसनी
  • 15 जनवरी को शिवसेना नेता संजय राउत ने किया था ये दावा
  • मुंबई के पुलिस कमिश्नर तय किया करती थी डी-कंपनीः राउत
शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर बुधवार को बड़ा बयान दिया था. एक इंटरव्यू में संजय राउत ने दावा किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला से मिलने के लिए मुंबई आया करती थीं. मुंबई में अंडरवर्ल्ड की बात करते हुए राउत ने कहा कि एक दौर था जब दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और शरद शेट्टी मुंबई के पुलिस कमिश्नर तय किया करते थे. लेकिन अब वो यहां सिर्फ चिल्लर हैं. आइए जानते हैं कौन था करीम लाला.

अफगानिस्तान से आया था भारत

करीम लाला का असली नाम अब्दुल करीम शेर खान था. उसका जन्म 1911 में अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में हुआ था. उसे पश्तून समुदाय का आखिरी राजा भी कहा जाता है. उसका परिवार काफी संपन्न था. वह कारोबारी खानदार से ताल्लुक रखता था. जिंदगी में ज्यादा कामयाबी हासिल करने की चाह ने उसे हिंदुस्तान की तरफ जाने के लिए प्रेरित किया था.

अंडरवर्ल्ड का पहला माफिया डॉन था करीम लाला

हाजी मस्तान मिर्जा को भले ही मुंबई अंडरवर्ल्ड का पहला डॉन कहा जाता है, लेकिन अंडरवर्ल्ड के जानकार बताते हैं कि सबसे पहला माफिया डॉन करीम लाला था. जिसे खुद हाजी मस्तान भी असली डॉन कहा करता था. करीम लाला का आतंक मुंबई में सिर चढ़कर बोलता था. मुंबई में तस्करी समते कई गैर कानूनी धंधों में उसके नाम की तूती बोलती थी. बताया जाता है कि वह जरूरतमंदों और गरीबों की मदद भी करता था.

हीरे और जवाहरात की तस्करी से शुरू किया धंधा

अब्दुल करीम शेर खान उर्फ करीम लाला ने 21 साल की उम्र में हिंदुस्तान आने का फैसला किया था. वह पाकिस्तान के पेशावर शहर के रास्ते मुंबई पहुंचा था. करीम लाला ने मुंबई में दिखाने के लिए तो कारोबार शुरू कर दिया था. लेकिन हकीकत में वह मुंबई डॉक से हीरे और जवाहरात की तस्करी करने लगा था. 1940 तक उसने इस काम में एक तरफा पकड़ बना ली थी. तस्करी के धंधे में उसे काफी मुनाफा हो रहा था. पैसे की कमी नहीं थी. इसके बाद उसने मुंबई में कई जगहों पर दारू और जुए के अड्डे भी खोल दिए. उसका काम और नाम दोनों ही बढ़ते जा रहे थे.

रोज घर पर लगता था जनता दरबार

लोगों के मामलों में मध्यस्थ के तौर पर शामिल होकर उन्हें निपटना करीम लाला की दिनचर्या में शामिल था. इस बात ने उसे इतना लोकप्रिय बना दिया था कि हर समाज और संप्रदाय के लोग उसके पास मदद मांगने आते थे. उसके यहां अमीर और गरीब का कोई फर्क नहीं होता था. बताते हैं कि मुंबई में उसके घर पर हर शाम जनता दरबार लगने लगा था. जहां वो लोगों से मिलता था. जरूरतमंदों और गरीबों की मदद करता था. वहीं, करीम लाला तलाक चाहने वाले लोगों को अक्सर समझाता था कि तलाक समस्या का हल नहीं होता.

जब हेलन की कमाई लेकर भाग गया था दोस्त

करीम लाला को फिल्म उद्योग के करीब माना जाता था. अभिनेत्री हेलन एक बार मदद के लिए करीम लाला के पास आई थीं. हेलन का एक दोस्त पीएन अरोड़ा उसकी सारी कमाई लेकर फरार हो गया था. वो पैसे वापस देने से मना कर रहा था. हताश होकर हेलन सुपरस्टार दिलीप कुमार के माध्यम से करीम लाला के पास पहुंचीं. दिलीप कुमार ने उन्हें करीम लाला के लिए एक खत भी लिखकर दिया. करीम लाला ने इस मामले में मध्यस्थता की और हेलन का पैसा वापस मिल गया था.

दाऊद की की थी पिटाई, जिसकी चर्चा आज भी होती है

तस्करी के धंधे में दाऊद के आने से करीम लाला हैरान परेशान था. दोनों के बीच दुश्मनी खुलकर सामने आ चुकी थी. बताते हैं कि एक बार में दाऊद इब्राहिम मुंबई में ही करीम लाला के हत्थे चढ़ गया था. दाऊद को पकड़ने के बाद करीम लाला ने जमकर उसकी पिटाई की थी. इस दौरान दाऊद को गंभीर चोटें आई थीं. यह बात मुंबई के अंडरवर्ल्ड में आज भी प्रचलित है.

दाऊद ने लिया था भाई की मौत का बदला

अंडरवर्ल्ड में दाऊद की एंट्री से पहले खून खराबा नहीं होता था. लेकिन करीम लाला से दुश्मनी लेकर दाऊद को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा. दोनों के बीच दुश्मनी और नफरत इस कदर बढ़ गई कि 1981 में करीम लाला के पठान गैंग ने दाऊद इब्राहिम के भाई शब्बीर की दिन दहाड़े हत्या कर दी थी. शब्बीर के कत्ल से दाऊद इब्राहिम तिलमिला उठा था. मुंबई की सड़कों पर गैंगवार शुरू हो गई थी. दाऊद गैंग और पठान गैंग के बीच खूनी जंग का आगाज हो चुका था. दाऊद अपने भाई की मौत का बदला लेना चाहता था और शब्बीर की मौत के ठीक पांच साल बाद 1986 में दाऊद इब्राहिम के गुर्गों ने करीम लाला के भाई रहीम खान को मौत के घाट उतार दिया था.

2002 में मुंबई में हुई थी मौत

मुंबई अंडरवर्ल्ड में 1981 से 1985 के बीच करीम लाला गैंग और दाऊद के बीच जमकर गैंगवार होती रही. नतीजा यह हुआ कि दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी ने धीरे धीरे करीम लाला के पठान गैंग का मुंबई से सफाया ही कर दिया. इस गैंगवार में दोनों तरफ के दर्जनों लोग मारे गए. लेकिन जानकार करीम लाला को ही मुंबई अंडरवर्ल्ड का पहला डॉन मानते हैं. हाजी मस्तान और करीम लाला की दोस्ती भी लोगों के बीच मशहूर रही. 90 साल की उम्र में 19 फरवरी, 2002 को मुंबई में ही करीम लाला की मौत हो गई थी

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