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Sunday, August 22, 2021

America News :- अमेरिका को भले ही हुआ हो 2.6 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान, अफगान युद्ध में ‘विजेता’ रहीं रक्षा कंपनियां

अफगानिस्तान (Afghanistan) युद्ध में अमेरिकी रक्षा कंपनियां कमाई के मामले में विजेता बनकर उभरी हैं। अमेरिका को भले ही दो ट्रिलियन डॉलर से अधिक गंवाने पड़े हों, लेकिन निजी कंपनियों ने मोटा मुनाफा दिया है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 20 साल तक चले युद्ध के बाद कंपनियों के शेयर मूल्य बढ़कर औसतन 10 गुना हो गए।

ब्राउन यूनिवर्सिटी की आकलन रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2001 से अब तक अफगानिस्तान (Afghanistan) युद्ध में अमेरिका ने कुल 2.26 ट्रिलियन (2260 अरब) डॉलर खर्च किए हैं। प्रतिदिन हुए नुकसान के हिसाब से यह आंकड़ा 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर है।

‘द इंटरसेप्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार शीर्ष पांच कंपनियों ने सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया है, जिनमें बोइंग सबसे आगे है। रिपोर्ट के मुताबिक 18 सितंबर, 2001 में जिसने इन कंपनियों में 10 हजार डॉलर का निवेश किया, आज उसका धन करीब एक लाख (97,795) डॉलर हो गया है। यह वही तारीख है जब राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अफगानिस्तान (Afghanistan) में सैन्य कार्रवाई करने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद से वर्ष 2021 तक अमेरिका ने अफगानिस्तान (Afghanistan) सेना पर कुल 83 अरब डॉलर खर्च किए यानी हर साल 4 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए।

शीर्ष पांच कंपनियों के काम और लाभ

बोइंग ने दिया 975 फीसदी लाभांश : बोइंग आमतौर पर वाणिज्यिक एयरलाइनर के जरिये कमाई करती है। इस कंपनी में वर्ष 2001 में जिसने 10 हजार डॉलर का निवेश किया, आज उसे 107,588.47 डॉलर मिलेंगे। यानी रकम 10 गुना से अधिक हो गई। बोइंग ने 975.88 फीसदी लाभांश दिया। बोइंग कंपनी बी-1 बांबर, बी-52एस, सी-17क कार्गो जेट, वी-22 ऑसप्रे वर्टिकल टेकऑफ विमान बनाती है। इसके अलावा इसके एफ-15 और एफ-18 लड़ाकू विमान भी बहुत घातक हैं। बी-1 बांबर का इस्तेमाल अफगानिस्तान में धड़ल्ले से हुआ।

रेथेऑन ने 331 फीसदी लाभांश दिया: सैन्य ठेके लेने के लिहाज से रेथेऑन दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है। वर्ष 2001 में जिसने इसमें 10 हजार डॉलर निवेश किया उसके पास आज 43,166 डॉलर हैं। यानी इसने 331 फीसदी लाभांश दिया। यह कंपनी ना केवल हथियार बेचती है, बल्कि प्रशिक्षण देने का भी ठेका लेती है। रेथेऑन टेक्नोलॉजी खुफिया और अंतरिक्ष सेवा भी मुहैया कराती है। इस कंपनी ने वर्ष 2020 में अमेरिकी सेना के साथ अफगानिस्तान वायुसेना के पायलट को प्रशिक्षण देने के लिए 14.5 करोड़ डॉलर का समझौता किया था।

लॉकहीड मार्टिन में मुनाफ 1235 फीसदी: लॉकहीड मार्टिन सैन्य ठेका लेने के लिहाज से विश्व की सबसे बड़़ी कंपनी है। इसके अलावा यह एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान भी बनाती है। इस कंपनी में जिसने वर्ष 2010 में 10 हजार डॉलर निवेश कर दिया आज उसके पास 1,33,559.21 डॉलर हैँ। यानि 20 साल में कमाई 10 गुना से अधिक हो गई। लॉकहीड मार्टिन कंपनी अपने घातक हेलीकाप्टर ब्लैक हॉक के लिए जानी जाती है, जिसका अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ।

जीडी का लाभ 625 फीसदी : जनरल डायनमिक्स (जीडी) ने युद्ध के दौरान 625 फीसदी से अधिक का लाभांश हासिल किया। इसमें जिसने 10 हजार डॉलर का निवेश किया उसके 20 साल बाद वर्ष 2021 में 72,515.58 डॉलर हो गए। इस कंपनी ने अपना हल्का हथियार युक्त वाहन (एलएवी-25) उपलब्ध कराया जिसका अफगानिस्तान में जमकर इस्तेमाल किया गया। यह कंपनी आईटी और साइबर सुरक्षा संबंधी सेवा भी उपलब्ध कराती है।

नॉर्थरोप ग्रुमैन का लाभांश 1196.14 फीसदी : स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से जारी डाटा के मुताबिक इस कंपनी ने 1196.14 फीसदी से अधिक का लाभांश हासिल किया। 1939 में स्थापित इस कंपनी ने 20 साल के दौरान 29.22 अरब डॉलर कमाए। कंपनी में जिसने वर्ष 2001 में 10 हजार डॉलर निवेश किए उसे आज 1,29,644 डॉलर मिलेंगे। दुनिया के बड़े हथियार निर्माताओं में शामिल यह कंपनी समुद्र, जमीन और हवा में मार करने वाले हथियार बनती है जिसमें ड्रोन, जंगी विमान, चेन गन, मिसाइल डिफेंस सिस्टम आदि बनाती है। इसने अमेरिकी सेना को बड़े पैमाने पर ड्रोन दिए हैं।

अन्य कारोबारी समूहों ने भी कमाया

रक्षा कंपनियों के अलावा अन्य अमेरिकी कंपनियों ने भी मोटी कमाई की है। इनमें केबीआर, डाइनकॉर्प इंटरनेशल और फ्लुअर कॉर्पोरेशन समेत अन्य कंपनियां शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर डाइनकॉर्प को अफगान पुलिस फोर्स को प्रशिक्षित करने और हथियारबंद करने का ढाई अरब डॉलर का ठेका मिला था।

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