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Wednesday, August 11, 2021

India news in hindi :- उपराष्ट्रपति की भावुक अपील का भी असर नहीं, उच्च सदन में फिर नीची हरकत, पेपर फाड़ आसन पर उछाले

संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में बुधवार को भी जमकर हंगामा देखने को मिला है। विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी नेता राज्यसभा के वेल में इकट्ठा हुए और नारे लगाने लगे। यहां तक कि कई सांसदों ने पेपर को फाड़ कर उसे हवा में फेंकते हुए नजर आए। बता दें कि राज्यसभा में मंगलवार को जब कृषि के मुद्दे पर चर्चा शुरू होने वाली थी तो विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच बाजवा को सदन के भीतर अधिकारियों की मेज पर चढ़कर एक सरकारी फाइल को आसन की ओर फेंकते हुए देखा गया था। जबकि संसद सत्र को सुचारू रूप से चलने के लिए राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सदस्यों से भावुक अपील की थी।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को सदन में हुई घटना पर क्षोभ व्यक्त करते हुए बुधवार को रुंधे गले से कहा कि वह रात भर सो नहीं सके क्योंकि लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर की पवित्रता भंग की गई। उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति ने कल की घटना पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि वह इस वरिष्ठ सदन की गरिमा पर आघात के कारण का पता लगाने के लिए प्रयास करते रहे।

संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर होता है

उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर होता है और इसकी पवित्रता पर आंच नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने कहा ''कल जो सदन में हुआ, वह पहले कभी नहीं हुआ। मैं बहुत दुखी हूं। उन्होंने कहा कि आधिकारियों की मेज और उसके आसपास का हिस्सा सदन के पवित्र गर्भ गृह की तरह है। इस मेज पर राज्यसभा के महासचिव, पीठासीन अधिकारी, अधिकारी और संवाददाता काम करते हैं।

हम मंदिरों, चर्चों और मस्जिदों की भूमि हैं

किसी भी स्थान की पवित्रता का उल्लंघन करने, चोट पहुंचाने या नष्ट करने के लिए कही गई या की गई हर बात अपवित्रता के समान है। हम मंदिरों, चर्चों और मस्जिदों की भूमि हैं। सभापति ने कहा कि संसद, हमारे देश की सर्वोच्च विधायिका को 'लोकतंत्र का मंदिर' माना जाता है। टेबल क्षेत्र जहां सदन के अधिकारी और पत्रकार, महासचिव और पीठासीन अधिकारी बैठते हैं, सदन का पवित्र गर्भगृह माना जाता है। निश्चित ही इस स्थान से पवित्रता जुड़ी हुई है।

याद दिलाई सदन की पवित्रता

भरे गले से नायडू ने कहा कि इस स्थान की भी पवित्रता है। उन्होंने कहा कि मंदिर में जब श्रद्धालु जाते हैं तो उन्हें एक निश्चित स्थान तक जाने की अनुमति होती है, उसके आगे नहीं। उन्होंने कहा कि सदन के बीचों बीच (आसन के समक्ष, मेज तक) आना इसकी पवित्रता को भंग करने जैसा है और पिछले कुछ वर्षों से ऐसा अक्सर हो रहा है।