RAFALE सौदे से 2 हफ्ते पहले Ambani ने फ्रांस के रक्षा अधिकारियों से की थी मुलाकात

अधिकारी जिसे कि बैठक के बारे जानकारी दी गई थी, उसके अनुसार अंबानी ने दोनों वाणिज्यिक और रक्षा हेलीकॉप्टरों में एयरबस हेलीकॉप्टरों के साथ काम करने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का भी उल्लेख किया था। जिसे कि तैयार किया जा रहा था और पीएम की यात्रा के दौरान उसपर हस्ताक्षर होने थे।
जब अंबानी ने फ्रांस के रक्षा मंत्री के कार्यालय का दौरा किया तो यह ज्ञात था प्रधानमंत्री मोदी अप्रैल 9-11, 2015 के बीच फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इसके बाद अंबानी पीएम की यात्रा के दौरान उनके प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जहां कि 36 राफेल विमानों को लेकर मोदी ने आधिकारिक घोषणा की थी। घोषणा के बाद पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने एक संयुक्त बयान जारी किया था।
संयोग से रिलायंस डिफेंस को इस बैठक के बाद उसी हफ्ते यानी 28 मार्च, 2015 को शामिल किया गया। 8 अप्रैल, 2015 को तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर पीएम की यात्रा से पहले मीडिया ब्रीफिंग में राफेल को लेकर जारी अटकलों को खारिज कर दिया था।
जयशंकर ने मीडिया से कहा था, 'राफेल के संदर्भ में, मेरी समझ है कि फ्रांस की कंपनी के साथ हमारे रक्षा मंत्रालय, एचएएल के बीच बातचीत चल रही है जो इसमें शामिल हैं। यह बातचीत जारी है। ये बहुत तकनीकी, विस्तृत चर्चाएं हैं। हम चल रहे रक्षा अनुबंधों के गहन विवरण के साथ नेतृत्व स्तर की यात्राओं का मिश्रण नहीं करते हैं। वह अलग ट्रैक पर है। एक नेतृत्व यात्रा आमतौर पर सुरक्षा क्षेत्र में बड़े मुद्दों को देखती है।'
सार्वजनिक क्षेत्र के एचएएल को कांट्रैक्ट में 108 राफेल विमान बनाने का लाइसेंस मिला था लेकिन उसकी नए सौदे में कोई भूमिका नहीं है। अनिल अंबानी का रिलायंस समूह भारत और फ्रांस के बीच हस्ताक्षरित यूरो 7.87 बिलियन के सौदे में ऑफसेट डिस्चार्ज के लिए राफेल विमानों के निर्माता दसॉल्ट एविएशन के लिए 'प्रमुख भागीदार' है। सौदे से कुल ऑफसेट का मूल्य लगभग 30,000 करोड़ रुपये है, और उस राशि में रिलायंस की सटीक हिस्सेदारी की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।