Supreme Court ने कहा, क्यों नहीं वाहनों का भी हो ‘परिवार नियोजन’

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि यहां वाहनों की संख्या इस कदर तक बढ़ चुकी है कि लोगों के पास इन्हें खड़ा करने तक की जगह नहीं है। आए दिन पार्किंग को लेकर मारपीट के साथ ही हत्या की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।
तिपहिया वाहनों की अधिकतम संख्या में बदलाव की अपील
पीठ ने दिल्ली में तिपहिया वाहनों की अधिकतम संख्या में बदलाव करने की अपील वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदूषण पर टिप्पणी की। याचिका में तर्क दिया गया है कि इन वाहनों से कम प्रदूषण होगा। दरअसल, दिल्ली में तिपहिया वाहनों की अधिकतम संख्या एक लाख हो सकती है।
2 करोड़ की आबादी पर 1.13 करोड़ वाहन
दिल्ली की आबादी करीब दो करोड़ है। वहीं, राजधानी में वाहनों की संख्या करीब 1.13 करोड़ हैं। इनमें से करीब 34 फीसदी कार हैं।
जस्टिस मिश्रा ने दिल्ली से बाहर बसने की जताई इच्छा
बढ़ते वायु प्रदूषण के मामले की सुनवाई के दौरान एक बार जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा था, दिल्ली में प्रदूषण इतना अधिक है कि वह सेवानिवृत्ति के बाद किसी अन्य शहर में बसना पसंद करेंगे।