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Saturday, September 21, 2019

पुलवामा हमले जैसी घटना महाराष्ट्र में बदल सकती है लोगों का मूड: शरद पवार

पुलवामा हमले जैसी घटना महाराष्ट्र में बदल सकती है लोगों का मूड: शरद पवार

शरद पवार (फाइल फोटो)
शरद पवार (फाइल फोटो) - फोटो : bharat rajneeti
महाराष्ट्र में आने वाले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सभी पार्टियों ने लोगों को अपने पक्ष में वोट करने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने एक बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि पुलवामा आतंकी हमले जैसी घटना महाराष्ट्र में लोगों का मूड बदल सकती है क्योंकि उनके मन में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार के लिए नाराजगी है। औरंगाबाद में शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए पवार ने कहा, 'लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गुस्सा और नाराजगी का माहौल था। हालांकि सीआरपीएफ जवानों पर पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने पूरे परिदृष्य को बदलकर रख दिया। अब लोगों के दिमाग को पुलवामा जैसी घटना से ही बदला जा सकता है।' पवार ने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने इस साल फरवरी में हुए पुलवामा हमले के बारे में पूछताछ की तो उन्हें शक था कि यह जानबूझकर किया गया था।

बता दें कि जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को एक आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया था। इस घटना में 40 जवान शहीद हो गए थे। इसका बदला लेते हुए मोदी सरकार ने 26-27 की दरमियानी रात को पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को नेस्तानाबूत कर दिया था। पवार ने आगे कहा कि एयरस्ट्राइक ने मोदी सरकार की लोकप्रियता को बढ़ाने में मदद की। हालांकि उन्होंने दावा किया कि मोदी की लोकप्रियता महाराष्ट्र में काम नहीं आएगी क्योंकि लोग फडणवीस सरकार से नाराज हैं।

एनसीपी अध्यक्ष ने कहा, 'विधानसभा चुनावों में भाजपा को हार मिलेगी। राष्ट्रवादियों से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। फडणवीस ने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिससे कि वह सत्ता में वापस आ सकें।' उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस और एनसीपी महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ेगी। उन्होंने कहा, 'हम ज्यादा धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। हमने कांग्रेस से हाथ मिलाया है और अब हमारी कोशिश है कि बहुजन विकास अघाडी, समाजवादी पार्टी और अन्य छोटी पार्टियों को अपने साथ लेकर आएं।'