बोर्ड परीक्षाओं में इतने फीसदी ही होंगे कठिन सवाल, विद्यार्थियों को बड़ी राहत - Politics news of India | Current politics news | Politics news from India | Trending politics news,India News (भारत समाचार): India News,world news, India Latest And Breaking News, United states of amerika, united kingdom

.

Friday, November 15, 2019

बोर्ड परीक्षाओं में इतने फीसदी ही होंगे कठिन सवाल, विद्यार्थियों को बड़ी राहत

बोर्ड परीक्षाओं में इतने फीसदी ही होंगे कठिन सवाल,
दसवीं और बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में अब 20 फीसदी ही कठिन सवाल होंगे। बाल दिवस पर स्कूल शिक्षा बोर्ड ने प्रदेश के विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए प्रश्नपत्रों का पैटर्न बदलने का फैसला लिया है।

इसके तहत 40 प्रतिशत आसान और 40 फीसदी औसत दर्जे के प्रश्न पूछे जाएंगे। बोर्ड परीक्षाओं में मॉडल टेस्ट पेपर से कोई भी सवाल नहीं आएगा। गुरुवार को राजधानी शिमला के लालपानी स्कूल में आयोजित प्रेस वार्ता में स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश सोनी ने यह जानकारी दी।

बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि तीन सीरीज में प्रश्नपत्र दिए जाएंगे। तीनों सीरीज में एक समान पैटर्न होगा। दस साल की नियमित सेवा देने वाले टीचर प्रश्नपत्र बनाएंगे।

इसके लिए 1800 से लेकर 2300 रुपये इन शिक्षकाें को दिए जाएंगे। पहले 1200 से 1500 रुपये दिए जाते थे। अब स्कूल प्रिंसिपल पेपर हॉल में निरीक्षक के तौर पर नहीं जा सकेंगे। बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों का सही आकलन करने के लिए यह बदलाव किया है।

बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि कोई भी सवाल आउट आफ सिलेबस नहीं आएगा। सबसे पहले प्रश्न बैंक तैयार किया जाएगा। उसके बाद पेपर सेटिंग होगी। बोर्ड का दावा है कि औसत दर्जे के छात्रों के लिए यह बदलाव अच्छे परिणाम लेकर आएगा।

बोर्ड ने गुरुवार को लालपानी स्कूल में राज्य मुक्त विद्यालय (एसओएस) की कार्यशाला आयोजित की। बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि एसओएस के सरकारी स्कूलों में 230 और निजी स्कूलों में 35 स्टडी सेंटर चलाए जा रहे हैं।

स्कूलों में शुरू होगा जल शक्ति अभियान

कार्यशाला में स्टडी सेंटर की समस्याओं, आईटी व शिक्षकों की आवश्यकता के बारे में चर्चा की गई। कार्यशाला में जिला सोलन, सिरमौर, शिमला और किन्नौर के एसओएस स्टडी सेंटर के समन्वयक व प्रधानाचार्य शामिल हुए।

बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि स्कूलों में जल शक्ति अभियान चलाया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों को जल संरक्षण के तरीके बताए जाएंगे। अभियान के तहत करीब 1 करोड़ से स्कूलों में दस फीट तक के टैंकों को निर्माण होगा।