जलोदर क्यों होता है कारण, लक्षण और घरेलू उपचार (Causes, symptoms and home remedies for ascites) - Politics news of India | Current politics news | Politics news from India | Trending politics news,India News (भारत समाचार): India News,world news, India Latest And Breaking News, United states of amerika, united kingdom

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Monday, January 31, 2022

जलोदर क्यों होता है कारण, लक्षण और घरेलू उपचार (Causes, symptoms and home remedies for ascites)

जलोदर क्यों होता है कारण, लक्षण और घरेलू उपचार (Causes, symptoms and home remedies for ascites)

आज के समय में हम सब लोग इतना व्यस्त हो गए हैं कि स्वास्थ्य को लेकर के बिल्कुल ध्यान नहीं जाता है जिसका असर पड़ता है कि हम कई बीमारियों के शिकार हो जाते हैं इन्हीं में से एक है जलोदर जिसे ascites की समस्या कहते हैं।यह क्यों होता है, इसके क्या कारण है, जलोदर का लक्षण क्या है, इसके क्या कारण है, जलोदर क्यों होता है, जलोदर के घरेलू उपचार क्या है आज के ब्लॉग के माध्यम से हम जानेंगे।

जलोदर की स्थिति में हमारा पेट फुला हुआ नजर आता है अगर सही समय पर जलोदर का इलाज नहीं किया जाता है तो हमारे अन्य शरीर के अंगों पर इसका प्रभाव पड़ेगा और हमारी कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है और इसके साथ ही और भी कई समस्याएं हमें हो सकती है, आइए सबसे पहले जानते हैं कि जलोदर आखिर है क्या

जलोदर आखिर है क्या (what is Ascites in Hindi)
  • जलोदर क्या है आइए जानते हैं जलोदर की स्थिति में पेट में तरल पदार्थ भर जाता है और हमारा पेट फुला हुआ नजर आता है और यह तरल पदार्थ झिल्लीदार परत के बीच में बनता है, जिसे peritoneal space कहते हैं।
  • जब यह तरल पदार्थ हमारी पेट में बहुत ज्यादा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है और इससे सांस लेने में भी हमें तकलीफ होने लगती है।
  • कुल मिलाकर के हम आप को संक्षेप में यही बताना चाहेंगे जलोदर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पेट में तरल पदार्थ भर जाता है और आपका पेट काफी फुला हुआ नजर आता है।
  • अगर यह समस्या आपके साथ है तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए नहीं तो आगे जाकर बहुत सारी समस्याओं के हम शिकार हो जाएंगे।
  • हमारी कार्यक्षमता भी इससे प्रभावित होती है, आइए अब हम जानते हैं कि जलोदर (Ascites) कितने प्रकार का होता है।
जलोदर के प्रकार (types of ascites in Hindi)

जलोदर जिसमें कि पेट में पानी भर जाता है और पेट आपका काफी फुला हुआ नजर आता है, इस स्थिति को जलोदर कहते हैं। लेकिन इसके भी कई प्रकार है जिसके बारे में हम आपको नीचे बता रहे हैं

जलोदर की स्थिति में नसों में जो ऑक्सीजन युक्त रक्त जाता है उस नस में बाधा आती है और यह स्थिति लीवर सिरोसिस का कारण बनता है, इसलिए जलोदर को लेकर हमें सावधान रहने की जरूरत है।

नेफ्रोजेनिक जलोदर (Nephrogenic ascites)

इस स्थिति में अगर किडनी संबंधी विकार होता है तो पेट में पानी भरने की संभावना होती है तो नेफ्रोजेनिक (Nephrogenic) किडनी संबंधी विकार कहलाता है, किडनी संबंधी विकार के कारण होने वाला रोग जलोदर कहलाता है।
मैलिग्नेंट जलोदर (Malignant ascites)
  • जलोदर का यह प्रकार जब शरीर के किसी अंग में कैंसर हो जाता है तो उस स्थिति में होने की संभावना रहती है।
इनफेक्शियस एसाइटिस (Infectious ascites)
  • जलोदर के इस प्रकार में फंगल या बैक्टीरियल या परजीवी की वजह से संक्रमण के कारण जलोदर की समस्या हो सकती है।
कार्डियोजेनिक जलोदर (Cardiogenic ascites)
  • इसमें हृदय की पंप की क्षमता कमजोर हो जाती है और हृदय की जो बाहरी परत है उसमें गंभीर सूजन हो जाता है।
मिस्लीनियस एसाइटिस (Mycelial ascites)
  • जलोदर की इस समस्या में ओवरी से जुड़ी समस्या देखने को मिलती है।
जलोदर साइनस (Ascites sinus)
  • असामान्य जलोदर की स्थिति कहलाता है, यह जब होता है तो शरीर में कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।
यह तो थे जलोदर के कुछ प्रकार अब हम बात करते हैं जलोदर के कारणों पर, किस कारण से जलोदर होता है उन कारणों को ध्यान से समझें

जलोदर किस कारण से होता है (what causes ascites)

जलोदर के कारण jalodar Rog Ke Karn
  • जो लोग धूम्रपान का सेवन करते हैं, उनके पेट में तरल पदार्थ होने की संभावना ज्यादा रहती है। उन्हें जलोदर रोग होने का संभावना बना रहता है। Causes of ascites in Hindi
  • क्योंकि धूम्रपान पेट संबंधी बीमारियों का मुख्य कारण माना जाता है, इसके अतिरिक्त पेट में संक्रमण रक्त का थक्का जमना इसका मुख्य कारण माना जाता है।
  • इसके अलावा अगर किसी को हेपेटाइटिस बी या पेट में संक्रमण या लीवर की नसों में रक्त का थक्का जमने की शिकायत है।
  • अगर अग्नाशय में सूजन है तो भी यह समस्या जलोदर होने का कारण माने जाते हैं, आइए अब उन कारणों की बात कर लेते हैं जिसके कारण जलोदर होने की संभावना ज्यादा रहती है।
लंबे समय तक धूम्रपान का सेवन करना
  • जो लोग लम्बे समय तक धूम्रपान का सेवन करते हैं उन्हें जलोदर होने की संभावना ज्यादा रहती है।
अपेंडिक्स या पेट संबंधी शिकायत जिन्हें होती है, उन्हें जलोदर को लेकर सावधान रहना चाहिए
  • अपेंडिक्स की शिकायत हो चुकी है, जिन्हें अपेंडिक्स की शिकायत हो चुकी है या फिर गर्भाशय पेनक्रियाज यानी अग्नाशय और लिवर से जुड़ी समस्या है, उन्हें जलोदर को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
जलोदर का एक कारण फैटी लीवर की समस्या हो सकता है
  • जिन्हें फैटी लीवर की शिकायत है उन्हें भी जलोदर होने की संभावना ज्यादा रहती है
लीवर की नसों में खून के थक्के जमना जलोदर का एक कारण है
  • अगर लीवर की नसों में रक्त के थक्के बनने से जलोदर यानी कि पेट में पानी भरने का कारण बनता है।
किडनी डायलिसिस (kidney dialysis)
  • किडनी डायलिसिस जिन लोगों ने करवा रखा है उन्हें जलोदर को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
जलोदर का एक मुख्य कारण हेपेटाइटिस बी और सी का इंफेक्शन है
  • जिन लोगों को हेपेटाइटिस बी और सी की समस्या होती है उन्हें भी जलोदर होने की संभावना ज्यादा होती है तो जलोदर का कारण एक यह भी माना जाता है।
हृदय की बाहरी परत में अगर सूजन हो जाए तो जलोदर होना तय है
  • अगर किसी के ह्रदय की बाहरी परत में सूजन हो जाता है तो ऐसी स्थिति में जलोदर होने की संभावना बढ़ जाती है।
अग्नाशय में सूजन जलोदर का कारण है
  • जलोदर होने का कारण अग्नाशय में सूजन भी होता है।
  • अब तक तो हमने जाना कि जलोदर के कारण क्या है आइए अब हम बात करते हैं कि वह कौन से लक्षण हैं जिनको देखकर हम यह जान पाएंगे कि हमें जलोदर की समस्या हो चुकी है।
जलोदर यानी पेट में पानी पड़ जाना के लक्षण जानें jalodar Rog Ke lakshan
  • जलोदर जिसे कि जलंधर या पेट में पानी भर जाना भी कहते हैं, यह यकृत संबंधी रोग की अंतिम अवस्था होती है।
  • इसमें पेट को छूने से पानी की लहरें स्पष्ट दिखाई देती है अगर आप पेट को छूते हैं तो आपको एहसास होता है कि आपके पेट में पानी है।
  • पेट आपका काफी सुजा हुआ नजर आता है, पानी भरने से पेट मटके के समान आपका नजर आता है।
  • इसके अलावा और भी कुछ लक्षण है जिनको कि हम बता रहे हैं उसको जानें वह कौन से लक्षण है
पेट का फूलना (flatulence)
  • अगर आपका पेट फुला हुआ ज़्यादा नजर आता है तो इसका मतलब है कि आपके पेट में पानी भरा हुआ है।
  • हालांकि कम पानी जब भरा रहता है तो उस समय जलोदर या जलंधर या पेट में पानी भरने की जो समस्या होती है, वह नजर नहीं आती है।
  • जब पानी पेट में ज्यादा हो जाता है तब जलोदर का रोग हमें दिखाई देता है।
पेट में ऐठन और मरोड़ होना (stomach cramps and cramps)
  • पेट में अगर ऐंठन और मरोड़ होता है तो यह भी जलोदर का एक लक्षण माना जाता है।
  • अगर इस स्थिति में आपका पेट फुला हुआ है तो उम्मीद रहता है कि आपको जलोदर की शिकायत हो चुकी है।
पैर के निचले हिस्से में सूजन होना (swelling in the lower leg)
  • पैर के निचले हिस्से में सूजन जलोदर के कारणों से भी होता है, यह जलोदर का लक्षण है।
वजन बढ़ना symptoms of ascites
  • अगर आप के वजन में लगातार वृद्धि हो रही है तो भी आप जलोदर को लेकर के सतर्क हो जाएं और इसकी जांच करवाएं।
चलने फिरने में तकलीफ का अनुभव होना
  • जिन लोगों को चलने फिरने में तकलीफ का अनुभव होता है उन्हें जलोदर को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
  • अगर इसी स्थिति में उनका पेट भी फुला हुआ है तो हो सकता है कि उन्हें जलोदर की शिकायत हो इसके लिए उन्हें इसकी जांच करवा लेना चाहिए। Jalodar ka ilaj
उल्टी और मतली की स्थिति बने रहना (Persistence of vomiting and nausea)
  • जलोदर का लक्षण के रूप में यह भी माना जाता है कि उल्टी और मतली आपको हमेशा बना रहता है, उस स्थिति में आपको जलोदर की जांच करवानी चाहिए।
पेट में दर्द बना रहना (stomach ache)
  • पेट में दर्द अगर बना रहता है तो उस स्थिति में भी जलंधर की शिकायत हो सकती है।
जल्दी पेट भरने का एहसास जलोदर का एक लक्षण है
  • जब हम खाना खाते हैं और लगता है कि हमारा पेट तुरंत ही भर गया तो इस स्थिति में हमें जलोदर को लेकर सतर्क होना चाहिए, यह भी एक जलंधर का पहचान है।
  • अब तक हमने जाना कि जलोदर की पहचान क्या है, उसके कारण क्या है जलोदर या जलंधर या पेट में पानी भरना क्या कहलाता है।
  • अब हम बात करेंगे की जलोदर की समस्या अगर आपको हो गई है तो इस स्थिति में आप को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए तो सबसे पहले बात करते हैं कि जलोदर की स्थिति में हमें क्या खाना चाहिए
जलोदर या जलंधर या पेट में पानी भरने वाले लोगों का आहार

जलोदर की स्थिति में क्या खाएं diet for a patient with ascites
  • जलोदर में क्या खाएं इसकी जानकारी होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि कोई भी उपचार तभी कारगर होता है जब व्यक्ति का खानपान सही होता है तो जलोदर के मरीज को क्या खाना चाहिए आगे जानते हैं
कम नमक वाले पदार्थ का सेवन करें
  • जलोदर की समस्या जिनको है उनको अपने खानपान में कम नमक का सेवन करना चाहिए।
अनानास का करें सेवन
  • जिनको भी जलोदर की शिकायत है उन्हें अनानास का सेवन करना चाहिए।
  • अनानास एक प्राकृतिक मूत्र वर्धक कहा गया है, यह शरीर को डिटॉक्स करता है और लीवर और किडनी को भी स्वस्थ बनाता है जलोदर की स्थिति में इसको खाना बहुत ही लाभकारी है।
खट्टे फल जैसे संतरा, अंगूर का सेवन करना (Consuming citrus fruits like oranges, grapes)
  • जिन्हें जलोदर की समस्या है उन्हें खट्टे फलों का सेवन करना चाहिए, खट्टे फल मूत्र वर्धक होते हैं।
  • और हम बार-बार मूत्र वर्धक की बात इसलिए कर रहे हैं कि आपके पेट का जो तरल पदार्थ है वह आसानी से पेशाब के रास्ते बाहर आ जाता है।
  • खट्टे फल अतिरिक्त जो शरीर में जमा हुआ पानी रहता है उसको बाहर निकालने में मददगार होते हैं।
फाइबर युक्त आहार का सेवन करें (eat fiber rich diet)
  • अपने आहार में फाइबर युक्त चीजों को शामिल करें यह आपके जलोदर की स्थिति में जो इंफेक्शन की समस्या होती है उसको कम करने में बहुत ही सहायक होता है।
जलोदर होने की स्थिति में क्या नहीं खाना चाहिए food to avoid with ascites
  • जलोदर होने की स्थिति में क्या खा सकते हैं यह आपने जाना अब हम जानते हैं कि जलोदर अगर है, हमें जालंधर की शिकायत है या फिर पेट में पानी भरने की शिकायत है ऐसे में किन चीजों से हमें परहेज करना चाहिए आइए इसको जानते हैं
नमक का सेवन कम करें
  • जिन्हें जलोदर की शिकायत है उन्हें नमक का सेवन कम कर देना चाहिए।
अल्कोहल का सेवन बंद करें ascites treatment
  • अगर अल्कोहल का इस्तेमाल करते हैं तो उससे आपके जलोदर की समस्या और बढ़ती है इसलिए अल्कोहल से दूर रहें।
तला- भुना खाने से परहेज करें
  • अगर आप अपने खानपान में तला- भुना खाना इस्तेमाल करते हैं और साथ में जलंधर की शिकायत है तो यह आपके लिए बहुत ही हानिकारक है।
  • इसलिए आपको इस स्थिति में तला-भुना खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि लीवर विकार के कारण जलोदर होने की संभावना रहती है।
फैटी लीवर जलोदर में वसायुक्त, मांस, दूध और दुग्ध उत्पाद के सेवन से बचें
  • अगर आपको जलंधर की समस्या है तो इसका मतलब है कि आपका लीवर फैटी है इस स्थिति में मांस, वसायुक्त जो चीजें हैं उसे नहीं खाना चाहिए।
  • इसके साथ ही दूध है दूध से बने उत्पाद हैं उनसे बचने की सलाह दी जाती है यानी जलंधर की स्थिति में आपको इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
उच्च मात्रा में सोडियम वाले पदार्थों को ग्रहण करने से बचें
  • जिन खाद्य पदार्थों में उच्च मात्रा में सोडियम होता है उसको खाने से आपको बचना है चाहे वह कोई भी पदार्थ क्यों न हो।
जलोदर को दूर करने के घरेलू नुस्खे jalodar ke gharelu upay
  • जलोदर के घरेलू उपचार क्या है आइए हम उसको जानते हैं कि वह कौन-कौन से उपचार हैं जिनको अमल में ला करके हम जलोदर के से बचाव कर सकते हैं तो आइए जानते हैं उन उपायों को
मेथी दाना है जलोदर का एक अच्छा घरेलू उपचार home treatment for ascites in Hindi
  • मेथी दाना जलोदर का कारगर उपचार माना जाता है। इसके लिए दो से तीन चम्मच मेथी दाना ले लीजिए और रात में उसको पानी में भिगो दीजिये।
  • अब मेथी से पानी को छान लीजिए और इस पानी को पी लीजिए। रोज सुबह मेथी का पानी पीजिए, बहुत ही फायदा देता है।
  • आप चाहे तो मेथी दाना भी खा सकते हैं।मेथी पेट संबंधी बीमारियों को दूर करने में घरेलू उपचार के रूप में माना गया है।
  • क्योंकि इसमें anti-cancer तत्व भी होते हैं इसलिए मेथी हमें काफी सुरक्षा प्रदान करता है और इसके साथ ही मेथी एसाइटिस कोशिकाओं के प्रसार को रोकने में सक्षम माना गया है।
  • इसलिए भी मेथी का सेवन जलोदर रोग के उपचार में काफी कारगर साबित हो सकता है।
गाजर का रस जलोदर का है कारगर घरेलू नुस्खा (Carrot juice is an effective home remedy for ascites)
  • तीन से चार गाजर ले लें और उसको जूसर में डालकर जूस निकाल दें। फिर उसको आप पीजिए यह घरेलू उपचार के रूप में जाना जाता है।
  • इससे फैटी लीवर की समस्या भी कम होती है यह बात शोध में निकल कर आया है।एनबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक गाजर के रस का सेवन बहुत कुछ हद तक फैटी लीवर को कम करने में राहत देता है।
  • इसके साथ ही जलोदर की समस्या को भी कम कर सकता है। इसलिए आप गाजर का भी सेवन कर सकते हैं।
मूली को न करें नजरअंदाज जलोदर का है यह अच्छा उपचार (Do not ignore radish, it is a good treatment for ascites)
  • मूली जलोदर के रोग को दूर करने में काफी सहायक है। इसके लिए मूली को छोटे-छोटे टुकड़े में काट लें और मूली का जूस निकाल लें।
  • इसके बाद इसके जूस को आप थोड़ा सा नमक डालकर के पी सकते हैं एक तो यह बॉडी को डिटॉक्स करने का काम करता है।
  • इसके अलावा फैटी लीवर की समस्या को भी कम करता है। इसलिए जलोदर से बचना चाहते हैं तो आप मूली का भी सेवन कर सकते हैं।
करेला है जलोदर का रामबाण इलाज (Bitter gourd is a panacea for ascites)
  • जलोदर के इलाज के रूप में करेला का इस्तेमाल काफी कारगर रहेगा, इसके लिए करेले को छीलने और उसका बीज निकालने और उसका जूस बना लें।
  • फिर उस जूस को आप नींबू का रस और नमक मिलाकर पी सकते हैं।यह फैटी लीवर को कम करता है।
  • इसके साथ ही जॉन्डिस की जिनको समस्या है उनके लिए भी बहुत ही उपयोगी होता है।
  • इसलिए जलोदर के लोगों को करेले का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि फैटी लीवर जलोदर के मुख्य कारणों में एक माना जाता है।
  • करेला फैटी लीवर को कम करता है, इसके साथ आप करेला अपने आहार में भी शामिल करिए यह बहुत ही फायदेमंद साबित होगा।
कुल्थी की दाल का करें सेवन (Consume Kulthi dal)
  • कुल्थी की दाल का सूप तैयार करके जलंधर की समस्या को कम किया जा सकता है।
  • इसके लिए कुल्थी की दाल को रात में पानी में भिगो दीजिये और सुबह इसका दाल बना लीजिए।
  • काली मिर्च, लहसुन और टमाटर को मिक्स कर लीजिएगा खाने में अच्छा लगेगा।
  • उबली हुई कुलथी की दाल को पीसकर के पेस्ट बना लें और 3 से 4 मिनट तक इसे पकाएं इसके गुनगुना होने पर पी सकते हैं।
जलंधर की समस्या होने पर प्याज को करें इस्तेमाल (Use Onion in case of Jalandhar problem)
  • जलंधर रोग में प्याज का उपयोग किया जाता है यह काफी लाभकारी है। इससे फैटी लीवर की समस्या दूर होती है और साथ फैटी लीवर को प्याज नियंत्रित करता है।
  • इसलिए जलंधर के इलाज में प्याज को काफी कारगर माना गया है। प्याज में लीवर की सूजन को कम करने की क्षमता पाई गई है।
  • प्याज फैटी लीवर की भी समस्या को कम करता है इसलिए प्याज का सेवन आपका दिन के खाने में भी कर सकते हैं।
  • कच्चा प्याज काट कर के आप उसे खाइए आप के लिए काफी फायदेमंद रहेगा।
जलोदर रोग का अदरक है घरेलू इलाज jalodar Rog ki prakritik chikitsa
  • अदरक को जलोदर रोग के घरेलू नुस्खे के रूप में जाना जाता है। इसके लिए अदरक को कुछ देर पानी में गर्म करें जब पानी गुनगुना हो जाए तो उसे पिलें।
  • याद रखें उसमें शहद की मात्रा थोड़ा आप मिला दें, आयुर्वेदिक दवा के रूप में भी अदरक के फायदे हैं।
  • अदरक में मौजूद एंटीट्यूमर और एंटी कैंसर के गुण पाए जाते हैं जो कि कैंसर की कोशिकाओं को प्रसार होने में रोकते हैं।
  • इसलिए अदरक का उपचार जलंधर के रूप में किया जाता है जलोदर रोग के उपचार में अदरक का प्रयोग किया जाता है।
पुनर्नवा का चूर्ण है कारगर उपाय jalodar Rog ka ayurvedic upchar

पुनर्नवा का चूर्ण है जलंधर रोग का घरेलू नुस्खा
  • पुनर्नवा का जड़ ले लें, इसको महीन पीसकर के चूर्ण बना लें वैसे बाजार में भी यह चूर्ण मिलता है वहां से भी आप खरीद सकते हैं।
  • 3 ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी के साथ आपको खाना है यह मूत्रवर्धक होता है और इसके साथ एनीमिया की भी शिकायत दूर होती है।
  • कब्ज से बचाव होता है, इसलिए जलंधर रोग के लिए यह काफी कारगर होता है।
जलोदर रोग में लहसुन है कारगर घरेलू नुस्खा jalodar Rog Ke ayurvedic upay
  • जलोदर रोग में लहसुन कारगर घरेलू नुस्खे के रूप में जाना जाता है इसके लिए लहसुन की तीन- चार कलियां ले लें, इसे खाली पेट आप खा सकते हैं।
  • या इसका रस निकालकर के खाली पेट सुबह-सुबह लहसुन का रस इस्तेमाल किया जा सकता हैं। लहसुन के प्रयोग से जलोदर रोग का उपचार किया जाता है।
  • लहसुन लीवर संबंधी नसों से जुड़ी समस्या को ठीक करने में सहायक है और लीवर संबंधी जो भी समस्या होती है नसों की वह जलोदर रोग का कारण माना जाता है।
  • इसके साथ ही एसाइटिस की समस्या में भी लहसुन को कारगर माना गया है, इस आधार पर जलोदर के रूप में लहसुन कारगर है।
मालिश जलोदर रोग का है उपचार jalodar Rog ka ayurvedic treatment
  • जलोदर रोग की समस्या में मालिश को घरेलू नुस्खे के रूप में जाना जाता है। मालिश के माध्यम से जलोदर रोग की समस्या कम होती है।
  • इसके लिए दो चम्मच अरंडी का तेल ले लें या नारियल का तेल या बादाम का तेल जो भी आपके पास उपलब्ध हो।
  • इन तेलों से 15 से 20 मिनट तक पेट पर हल्का- हल्का मालिश करिए और ऐसे ही छोड़ दीजिए।
  • अब प्रतिदिन इससेे मालिश करिए इसका फायदा नजर आने लगता है।
  • इससे दर्द, थकान, मतली, चक्कर आना भूख की कमी सांस लेने में तकलीफ चलने फिरने में परेशानी और शरीर का वजन जो बढ़ता है यह सभी लक्षण होते हैं। इसलिए आप मालिश का प्रयोग कर सकते हैं।
जलोदर की जांच कैसे की जाती है (How is ascites tested?)
  • अब हम बात करते हैं जलोदर की जांच को लेकर, जलोदर की जांच कैसे की जाती है तो जलोदर की जांच पेट पिचका करके या पेट दबा कर के भी कर सकते हैं।
  • इससे पेट फुला हुआ काफी लगता है और सूजन महसूस होती है तो ऐसे में निम्न जांच कराया जाता है।
  • सबसे पहला जांच मूत्र जांच होता है, पेशाब जांच होता है पेशाब जांच से पता चल जाता है कि हमें जलोदर की शिकायत है।
  • किडनी की जांच से यह पता चल जाता है कि उसकी कार्यक्षमता कैसी है। अगर कोई दिक्कत आता है तो इसका मतलब है कि जलोदर की शिकायत है।
  • पेट का अल्ट्रासाउंड जलोदर की जांच के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है, इससे स्थिति क्लियर हो जाती है कि हमारा जलोदर किस समस्या के कारण है।
  • जोखिम का अनुमान लगाने के लिए खून में प्रोटीन की उपस्थिति की जांच
  • पेट में मौजूद तरल पदार्थ की जांच के द्वारा भी जलोदर का पता लगाते हैं।खून में प्रोटीन की मात्रा से भी पता चल जाता है कि हमें जलोदर हुआ है या नहीं।
  • तो यह थी जलोदर की जांच कैसे की जाती है उसकी प्रक्रिया।अब हम बात करते हैं कि जलोदर के लिए हम किस तरह के योग का इस्तेमाल कर सकते हैं
पेट में पानी भरने का इलाज के रूप में निम्न प्रक्रिया करें Jalndhar (pet mein pani) ka ilaj

जलोदर के लिए योग yoga for ascites
  • योग और एक्सरसाइज के बारे में तो हम सभी जानते हैं कि किसी भी बीमारी को दूर करने में काफी सहायक है।
  • योग से किसी बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है तो इसलिए जलोदर में भी योग करने की सलाह दी जाती है।
  • जलोदर के बारे में कहा जाता है कि समस्या चाहे कितनी भी जटिल होती है।
  • अगर सही तरीके से हम खान-पान का इस्तेमाल करते हैं योग एक्सरसाइज करते हैं तो उसके द्वारा भी हमारा समस्या बहुत हद तक कम हो जाता है।
  • इसलिए हमें योग एक्सरसाइज पर विशेष ध्यान देना चाहिए और इसके लिए आप मयूरासन कर सकते हैं, जिसे पीकॉक आसान भी कहा जाता है।
  • इसके साथ ही लोलासन होता है, इससे भी जलंधर रोग में सहायक माना गया है। पद्मासन आप कर सकते हैं वह भी जलंधर रोग की समस्या में काफी प्रभावी होता है।
  • बहुत जल्दी एक्सरसाइज को करने से हमारी समस्या कम होने लगती है।
जीवन शैली में बदलाव
  • अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं, इससे कोई भी रोग पर रोकथाम जल्दी लगता है।
  • जिससे परहेज करना है आपको वह है नमक। नमक का उपयोग कम करना है। यह आपके जलोदर के रूप को कम करने में काफी सहायक होगा।
  • अपने जीवन शैली में बदलाव करते हुए जो भी खानपान आपको ऊपर बताए गए हैं कि उनको खाने से जलोदर की समस्या कम हो सकती है उनको खाइए।
  • जिन चीजों को आपको बताया गया है परहेज उन चीजों से परहेज करें जिससे जलोदर की समस्या से आप दूर रह सकते हैं।
  • आइए अब हम उन सवालों को जानते हैं जो लोग अक्सर पूछते हैं
Faq

पेट में पानी भरने का इलाज क्या है (what is the treatment for watery stomach)
  • कई मरीजों के पेट में पानी भर जाता है। ऐसे में कई लोगों के पेट में पानी भरने की शिकायत सुनी गई है, ऐसे में नमक को कम करके इस पर काबू पाया जा सकता है।
  • यदि पानी की मात्रा अधिक हो तो इसे निकाला जाता है साथ ही जो भी मुत्र वर्धक समान है जैसे अनानास है, लहसुन है, प्याज है।
  • इन सब चीजों का सेवन हमें नियमित रूप से करना चाहिए जिससे पेट में पानी भरने की समस्या में राहत पाए जा सके।
जलोदर कौन सी बीमारी को कहा जाता है (Which disease is called ascites)
  • जलोदर पेट में पानी भरना या जलंधर रोग में उदर गुहा में पानी संचित हो जाता है इससे हमारा पेट बड़ा दिखता है जो कि जलोदर कहलाता है।
  • यह कोई रोग तो नहीं होता है लेकिन हमारे शरीर से उत्पन्न विकार है। अगर आपका पेट फुला हुआ है तो जलोदर की जांच जरूर करवानी चाहिए।
पेट में पानी क्यों बोलता है (Why does water speak in the stomach)
  • पेट में आवाज आना तो कोई समस्या नहीं है लेकिन यदि ऐसा बार-बार होता है कि पेट से कुछ आवाज आती है तो इससे आप को हल्के में नहीं लेना है
  • खानपान की लापरवाही के कारण भी ऐसा हो सकता है एसिडिटी गैस खाली पेट होना सभी इसके कारण हो सकते हैं।
  • अगर बार-बार यह समस्या आ रही है तो इसकी जांच जरूर कराएं कहीं आपको जलोदर की समस्या तो नहीं है।
पेट टाइट होने के क्या कारण है (what are the causes of tight stomach)
  • पेट टाइट होना कई कारणों से हो सकता है। हार्मोन असंतुलन, बासी भोजन का सेवन, पेट में पानी या फ्लूइड का भरजाना इसके कारण हो सकते हैं।
  • इसके साथ ही ज्यादा देर तक भूखे या कई घंटे तक एक जगह तक बैठे रहना पेट फूलने का कारण बनते हैं।
लिवर में सूजन के क्या लक्षण है (what are the symptoms of liver inflammation)
  • लीवर में सूजन या लीवर के सिकुड़ने से हमें परेशानी होती है। थकान, कमजोरी, शरीर में हल्का दर्द पेट के बीचों-बीच और दाहिने हिस्से में दर्द और भारीपन की भी शिकायत होती है।
  • इसके लिए हम अपने जीवन शैली में अगर बदलाव करें योग एक्सरसाइज को अपनाएं खानपान में परिवर्तन करें तो इस परेशानी को हम आसानी से कम कर सकते हैं
जलोदर के लक्षण क्या है (what are the symptoms of ascites)

जलोदर के लक्षण आमतौर पर थकान, जी मिचलाना, दम फूलना भूख न लगना बार बर पेशाब लगना और कब्ज की समस्या होती है अगर यह संकेत देते हैं तो उसी से नजरअंदाज नहीं करें और ऐसे में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

पेट में पानी भरने से क्या दिक्कत आती है (What is the problem of filling water in the stomach?)
  • पेट में पानी भरने से बहुत सारी दिक्कतें होती है, उन्हें इंफेक्शन हो जाता है इसके अलावा आहार नली और बीच की नली में ब्लीडिंग भी होता है।
  • कई बार यह लीवर कैंसर के रूप में सामने आता है , इसके साथ ही हैपेटिक एन्सेफेलोपैथी होता है।
  • पेट में पानी भरने से बहुत सारी समस्याएं आती है हमें थकान कमजोरी महसूस होती है।
  • इसके साथ ही हमारा किसी काम में मन नहीं लगता उसके साथ और भी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है लीवर की समस्या हो जाती है जो कि कैंसर का रूप ै सकता है
जलोदर के क्या कारण होते हैं (what are the causes of ascites)
  • जलोदर का मुख्य कारण लंबे समय तक शराब का सेवन करना है। इससे पीठ में तरल पदार्थ जमा होने लगता है और उससे जलोदर रोग होता है।
  • इसके साथ ही हेपेटाइटिस बी और सी की जिनको शिकायत होती है उन्हें भी जलोदर की समस्या होती है।
  • इससे लीवर की नसों में रक्त का थक्का जमता है, अग्नाशय में सूजन होता है तो भी यह सभी जलोदर के कारण माने जाते हैं। पेट में संक्रमण है तो भी जलोदर होने का कारण माना जाता है।
क्या जलोदर में पानी नहीं पीना चाहिए (Should not drink water in ascites)
  • जलोदर में जापानी कंपनी की सलाह देते हैं जिन्हें जलोदर वर्तमान में है और बढ़ा हुआ है तो ऐसी स्थिति में प्यास लगने पर उन्हें फलों का रस, दही का पानी, मखनिया ताजा, मट्ठा, गाय का दूध और मक्खन देना चाहिए।
  • इसके अलावा कुछ और पीने की सलाह नहीं दी जाती है जलोदर की समस्या में डॉक्टर पानी का सेवन कम करने की सलाह देते हैं।
  • और ऐसे में जलोदर की स्थिति पर निर्भर करता है कि पानी पीना कितना लाभकारी है।
अंतिम शब्द (FINAL WORD)

इस प्रकार आज के Blog के माध्यम से हमने जाना कि जलोदर क्यों होता है, इसके कारण क्या है, इसका लक्षण क्या है किन घरेलू नुस्खों (gharelu nuskhho) की सहायता से हम जलोदर को दूर कर सकते हैं। उम्मीद है कि इस पर लिखा गया यह ब्लॉग आपके लिए काफी मददगार होगा हम आगे भी इसी तरह से स्वास्थ्य वर्धक लेख लाते रहेंगे।

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